मुंबई में शिवसेना(UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि अरुंधति रॉय ने जो भी कहा है, वो पूरी तरह से गलत है. जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है. अगर कोई इसमें दरार डालना चाहेगा तो हम उसका विरोध करेंगे. लेकिन, सवाल यह है कि यह मामला 2010 का है और पिछले 10 सालों से केंद्र में पीएम मोदी की सरकार है, वे इस मुद्दे पर अब तक चुप क्यों थे? 10 साल बाद जब कम बहुमत वाली सरकार बनी है, तो ये फैसला राजनीतिक लगता है.
दरअसल दिल्ली के एलजी की मंजूरी मिलने के बाद अब अरुंधति रॉय पर आतंकवाद विरोधी कानून (UAPA) के तहत केस चलाया जाएगा, क्योंकि कश्मीर के एक सामाजिक कार्यकर्ता सुशील पंडित ने अरुंधति रॉय सहित अन्य लोगों पर भड़काऊ भाषण देने को लेकर मुकदमा दर्ज कराया था.
शिकायतकर्ता ने सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत नई दिल्ली स्थित मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में शिकायत की थी. जिसके बाद 27 नवंबर 2010 को FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया था. उसी मामले में दिल्ली के उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने शुक्रवार को अरुंधित रॉय पर UAPA के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है.
इस मामले में अरुंधति रॉय के साथ-साथ कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. शेख शौकत हुसैन पर भी केस चलेगा. मीडिया रिपोर्ट्स से जानकारी मिली है कि इनके अलावा भाषण देने वालों में दिवंगत हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी. एसएआर गिलानी और वरवर राव का भी नाम शामिल है.
इन लोगों पर आरोप लगा था कि इन्होंने भड़काऊ भाषण दिया है. आरोप लगाया गया था कि गिलानी और अरुंधति रॉय ने ऐसा भाषण दिया था, जिसमें कहा गया था कि कश्मीर कभी भी भारत का हिस्सा था ही नहीं और भारतीय सेना द्वारा जबरन कब्जा किया गया था. इस दौरान उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर को भारत से आजाद करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए.
बताते चलें कि कोर्ट में शिकायतकर्ता के द्वारा भाषण की रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध कराई गई थी. अधिकारियो नें बताया है कि रिकॉर्डिंग मिलने के बाद FIR दर्ज की गई और कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया.