हाथों में हथकड़ी, प्यास लगने पर पानी नहीं, प्रवासियों पर जुल्म ढाह रहा अमेरिका!

Deepa Bisht 27 Jan 2025 03:21: PM 2 Mins
हाथों में हथकड़ी, प्यास लगने पर पानी नहीं, प्रवासियों पर जुल्म ढाह रहा अमेरिका!

नई दिल्ली: ट्रंप प्रशासन के तहत अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों को उनके देशों में भेजने की प्रक्रिया को और तेज कर दिया गया है. इस कदम के तहत कई देशों के नागरिकों को वापस भेजा जा रहा है, जिनमें ब्राजील के नागरिक भी शामिल हैं. हाल ही में ब्राजील से लौटे कुछ प्रवासियों ने अमेरिका में अपनी वापसी के दौरान हुई दुर्व्यवहार की दर्दनाक कहानी साझा की है.

इन प्रवासियों ने बताया कि उन्हें फ्लाइट में यात्रा करते वक्त बेहद असंवेदनशील तरीके से पेश आया गया. उन्हें बिना पानी और एयर कंडीशनिंग के साथ हथकड़ी लगाकर फ्लाइट में बिठाया गया. इसके अलावा, वे लगातार प्यासे थे और उनकी कोई सहायता नहीं की गई. उनके अनुसार, यह स्थिति न केवल शारीरिक रूप से पीड़ादायक थी, बल्कि मानसिक रूप से भी उन्हें अत्यधिक कष्ट हुआ.

ब्राजील की सरकार ने इस घटना को लेकर अमेरिकी प्रशासन से कड़ी नाराजगी जताई है. सरकार ने इस प्रकार की कार्रवाई को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया है और अमेरिकी अधिकारियों से इस मामले की जांच की मांग की है. ब्राजील के अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की अमानवीय और असंवेदनशील कार्रवाई किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है और इससे अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.

ब्राजील के विदेश मंत्री ने इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा, "हम अपने नागरिकों के साथ इस प्रकार का व्यवहार बर्दाश्त नहीं करेंगे. अमेरिका को अपनी प्रवासी नीति पर पुनः विचार करना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति इस तरह के दमनात्मक व्यवहार का शिकार न हो." अमेरिका के ट्रंप प्रशासन के दौरान प्रवासी नीति को कड़ा कर दिया गया था, और अवैध प्रवासियों को उनके देशों में वापस भेजने की प्रक्रिया को तेज किया गया. यह नीति अब भी जारी है, हालांकि इस पर विवाद बने हुए हैं. ट्रंप के शासन के दौरान, अमेरिका ने कई देशों के अवैध प्रवासियों को निशाना बनाते हुए उन्हें निर्वासित किया.

वर्तमान प्रशासन ने हालांकि इस नीति में कुछ बदलाव किए हैं, लेकिन अभी भी प्रवासियों के खिलाफ सख्त कानून लागू हैं. अमेरिका की यह नीति उन देशों में असंतोष और असुरक्षा का कारण बन रही है, जहां के नागरिकों को अपने अधिकारों का उल्लंघन होते हुए महसूस हो रहा है. ब्राजील से लौटे प्रवासियों ने कहा कि उनका सफर बेहद दर्दनाक और तनावपूर्ण था. एक प्रवासी ने बताया, "हमें बिना किसी संजीवनी के बैठाया गया, ना पानी था, ना एयर कंडीशनिंग. फ्लाइट में बहुत ही तंग स्थिति थी और हथकड़ी लगाकर हमें बिठाया गया. हमें किसी प्रकार की दया नहीं दिखाई गई."

उन्होंने आगे कहा कि यह अनुभव उनके लिए एक मानसिक शोषण जैसा था, और इसने उनके आत्म-सम्मान को भी ठेस पहुंचाई. ब्राजील और अमेरिका के बीच इस घटना के बाद कूटनीतिक तनाव बढ़ने की संभावना है. ब्राजील सरकार ने अमेरिका से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है और प्रवासियों के साथ किए गए अत्याचार के लिए मुआवजा देने की भी बात की है.

इसके अलावा, इस प्रकार की घटनाओं से अमेरिका की प्रवासी नीति पर सवाल उठने लगे हैं और यह बात अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी चर्चा का विषय बन गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस मामले को ठीक से न सुलझाया गया, तो इससे दोनों देशों के रिश्तों में खटास आ सकती है. अमेरिका की इस कठोर प्रवासी नीति को लेकर आने वाले समय में और भी कई विवाद हो सकते हैं, क्योंकि यह नीति न केवल प्रवासियों के लिए, बल्कि कई देशों के साथ अमेरिका के रिश्तों के लिए भी चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है.

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