सोनम वांगचुक के नाम पर सुलग रहा पहाड़? उत्तराखंड में गिरफ्तारी को लेकर भारी विरोध-प्रदर्शन

Amanat Ansari 28 Sep 2025 03:06: PM 2 Mins
सोनम वांगचुक के नाम पर सुलग रहा पहाड़? उत्तराखंड में गिरफ्तारी को लेकर भारी विरोध-प्रदर्शन

देहरादून/नैनीताल: पर्यावरणविद्, शिक्षा विशेषज्ञ और नवोन्मेषक सोनम वांगचुक को शुक्रवार को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत गिरफ्तार किए जाने के बाद उत्तराखंड में विरोध प्रदर्शन देखने को मिले. शनिवार को राज्य भर में कार्यकर्ताओं, निवासियों और सिविल सोसाइटी समूहों ने वांगचुक के समर्थन में प्रदर्शन आयोजित किए. देहरादून के गांधी पार्क में कई नागरिक इकट्ठा हुए, जहां उन्होंने वांगचुक की तत्काल रिहाई की मांग की और उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को हटाने की अपील की.

सेव हिमालयाज पीपुल्स कमिटी के डॉ. मुकेश सेमवाल ने कहा, "हिमालय में रहने वाले लोग उनकी गिरफ्तारी के तरीके से गहराई से आहत हैं. केंद्र की यह कार्रवाई लद्दाख में वंचनाओं, दमन और झूठे वादों के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन को और भड़काएगी, और यह संदेश देगी कि हिमालयी संसाधनों के लूट के खिलाफ कोई भी समझदार आवाज बर्दाश्त नहीं की जाएगी. वांगचुक ने प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना हिमालय में टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने के लिए नवोन्मेषी तरीके से अथक प्रयास किया है. उनकी गिरफ्तारी हिमालयी लोगों के हित और क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करने वाली आवाज को दबाने का स्पष्ट प्रयास है."

प्रदर्शनकारियों ने अनियंत्रित शहरीकरण, लापरवाह वनों की कटाई और अनियोजित जलविद्युत परियोजनाओं के कारण बादल फटने, बाढ़, भूस्खलन और भूकंप जैसी आपदाओं के बढ़ते जोखिमों पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने अधिकारियों से स्थानीय समुदायों के साथ संवाद करने और पर्यावरण संरक्षण को कॉर्पोरेट हितों से ऊपर रखते हुए समयबद्ध टिकाऊ विकास योजनाएं तैयार करने का आग्रह किया.

नैनीताल के तल्लीताल डाट में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने मोमबत्ती जलाकर विरोध प्रदर्शन किया गया, जहां समर्थकों ने एकजुटता व्यक्त की और वांगचुक की रिहाई की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह गिरफ्तारी उनकी शांतिपूर्ण वकालत को दबाने का प्रयास है. ज्योतिर्मठ स्थित नागरिक समूह जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती ने वांगचुक की तत्काल रिहाई की मांग को दोहराया.

उन्होंने कहा कि "पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील हिमालयी क्षेत्रों में लोकतांत्रिक आवाजों को दबाना न केवल स्थानीय समुदायों के लिए खतरनाक है बल्कि पारिस्थितिक और रणनीतिक सुरक्षा के लिए भी खतरा है." सती ने कहा, "हिमालयी क्षेत्र पहले से ही विनाशकारी विकास और जलवायु संकट का बोझ झेल रहा है. अब, इसके लोगों को चुप कराना लोकतंत्र, संविधान और हमारे पर्यावरण के भविष्य पर हमला है."

गिरफ्तारी के पीछे लद्दाख में बुधवार को एक बड़े प्रदर्शन का हाथ था, जो लंबे समय से चली आ रही अहिंसक आंदोलन का हिस्सा था, जिसमें पुलिस फायरिंग में चार प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई. वांगचुक ने 10 सितंबर से भूख हड़ताल शुरू की थी, जिसमें चार मांगें थीं: लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची के तहत समावेश, स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता और प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय निर्णय लेने का अधिकार.

Sonam Wangchuk protests Uttarakhand arrest Himalayas

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