नई दिल्ली: लोकसभा में कांग्रेस नेता और विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने हाल ही में भारत-अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते (India-US interim trade agreement) पर तीखा हमला बोला. उन्होंने दावा किया कि इस डील में भारतीय वस्त्र निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में 18% टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है, जबकि बांग्लादेश को कुछ शर्तों के साथ 0% टैरिफ का लाभ मिल रहा है.
राहुल गांधी का मुख्य आरोप यह है कि बांग्लादेश को अमेरिका में गारमेंट्स निर्यात पर शून्य शुल्क की छूट दी गई है, लेकिन इसके लिए उन्हें अमेरिकी कपास आयात करनी होगी. वहीं, भारत के कपड़ों पर 18% टैरिफ लगा हुआ है. उन्होंने कहा कि अगर भारत भी यही लाभ चाहता है, तो अमेरिकी कपास खरीदनी पड़ेगी, जिससे देश के कपास किसानों को भारी नुकसान होगा. न आयात करें तो वस्त्र उद्योग पिछड़ जाएगा, और आयात करें तो किसान प्रभावित होंगे. उन्होंने इसे आगे कुआं, पीछे खाई जैसी स्थिति बताया और आरोप लगाया कि मोदी ने देश के हितों से समझौता किया है.
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि बांग्लादेश अब भारत से कपास आयात कम या बंद कर सकता है, जिससे भारतीय किसानों और टेक्सटाइल सेक्टर पर दोहरा असर पड़ेगा. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सरकार भ्रम फैला रही है और यह समझौता कपास किसानों व निर्यातकों के साथ धोखा है. उन्होंने पूछा कि यह तथ्य पहले क्यों छिपाया गया और ऐसी नीति क्यों अपनाई गई जो दोनों क्षेत्रों को नुकसान पहुंचाए.
कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह का पलटवार
दूसरी ओर, कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी के दावों को खारिज करते हुए कहा कि वे तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं. मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत ने अमेरिका के साथ संतुलित और बेहतर समझौता किया है, जो उद्योग के विकास के साथ किसानों के हितों की भी रक्षा करता है. उन्होंने बताया कि भारतीय वस्त्र निर्यात अब 100 से ज्यादा देशों में फैल चुका है और सिर्फ एक बाजार पर निर्भर नहीं रहा.
भारत को भी मिलेगी बांग्लादेश जैसी ही सुविधा
वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल ने भी जवाब देते हुए कहा कि भारत को भी बांग्लादेश जैसी ही सुविधा मिलेगी. यानी अमेरिकी कपास या यार्न आयात करने पर वस्त्र निर्यात पर शून्य टैरिफ का लाभ. उन्होंने राहुल के आरोप को झूठ करार दिया. उन्होंने जोर दिया कि भारत ने कई नए बाजारों (यूरोपीय संघ, यूके, न्यूजीलैंड आदि) में पहुंच बढ़ाई है, जिससे कुल $470 बिलियन का निर्यात अवसर पैदा हुआ है.