नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा की शादी इन दिनों चर्चा में है, क्योंकि दुल्हन की डोली उसके घर से न निकल कर अस्पताल से निकली है. इसमें वर पक्ष से लेकर वधु पक्ष तक का भरपूर सहयोग मिला और अस्पताल प्रबंधन ने भी विवाह में सहयोग करने की बात कही. सबसे ज्यादा योगदान दूल्हा का रहा, जिन्होंने दुल्हन के अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद शदी की तारीख आगे नहीं बढ़ाई और बारात लेकर सीधा अस्पताल पहुंच गया. दुल्हन उस समय ओपीडी में भर्ती थी, जहां शादी की सभी रश्में निभाई गई. इस दौरान दूल्हे ने दुल्हन को गोद में उठा कर सात जन्मों की कस्में खाई.
मीडिया रिपोर्ट्स से मिली खबर के अनुसार, कुछ महीने पहले आदित्य सिंह की शादी नंदिनी से तय हुई थी. लेकिन शादी से एक स्पताह पहले दुल्हन की तबीयत खराब हो गई. नंदिनी के परिजनों ने पहले उसे कुंभराज स्थिति अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन ठीक नहीं होने पर बीनागंज के भी विभिन्न अस्पतालों में दिखाया गया. जब नंदिनी की हालत में सुधार नहीं हुआ तो, उसे ब्यावरा स्थित पंजाबी नर्सिंग होम भर्ती किया गया. यहां डॉक्टरों ने उसे कुछ दिनों तक बेड रेस्ट करने और शादी की डेट को आगे बढ़ाने की सलाह दी.
डॉक्टरों की बात सुनकर वर पक्ष के लोग शादी को टालने की बात पर राजी नहीं हुए और अस्पताल में ही शादी समारोह आयोजन करने की ठानी. वहीं जब अस्पताल प्रबंधन से बात की गई, तो उन्होंने भी दोनों पक्षों के परिजनों की बात मान ली. इस दौरान दूल्हा बारात लेकर अस्पताल पहुंचा तो, गेट पर उनका स्वागत किया गया. इससे पहले पूरे अस्पताल को सजाया गया. रात एक बजे के करीब ओपीडी वार्ड में शादी की सभी रश्में पूरी की गई. दूल्हे दुल्हन को गोदकर में उठाकर सात फेरे लिए और जन्मों-जन्मों तक साथ निभान की कसमें खाई.