Tehsildar Amita Singh Tomar: मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में 2021 की भयानक बाढ़ के दौरान राहत कार्यों में हुए कथित घोटाले का मामला अब नया मोड़ ले चुका है. विजयपुर तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है. सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी अग्रिम जमानत की अर्जी को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसके चलते अब उनकी गिरफ्तारी की आशंका काफी बढ़ गई है.
कोर्ट की सुनवाई में जजों की बेंच ने स्पष्ट किया कि याचिका में जमानत देने लायक मजबूत आधार या कानूनी वजहें नहीं दिखाई दीं. साथ ही, उनकी विशेष अनुमति याचिका (SLP) भी ठुकरा दी गई. इससे पहले हाईकोर्ट ने भी इस तरह की राहत देने से इनकार कर दिया था.
यह पूरा प्रकरण 2021 में आई तबाही वाली बाढ़ से जुड़ा है, जब प्रभावितों को मिलने वाली सरकारी मदद में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगा. जांच में पता चला कि बड़ौदा तहसील क्षेत्र में कुल 794 लोगों को प्रभावित माना गया था, लेकिन राहत की रकम 127 फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई. आरोप है कि लगभग 2 करोड़ रुपए की यह राशि असली पीड़ितों तक पहुंचने के बजाय गलत जगहों पर चली गई.
इस भ्रष्टाचार के मामले में बड़ौदा थाने की पुलिस ने तहसीलदार अमिता सिंह तोमर के अलावा 28 पटवारियों के खिलाफ केस दर्ज किया था. मामले में कुछ पटवारियों पर तो सख्ती से कार्रवाई हुई, लेकिन बाकी के खिलाफ अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने की शिकायतें हैं, जिससे भेदभाव के आरोप भी लग रहे हैं.
केबीसी में जीते थे 50 लाख रुपए
ये वही अमिता सिंह तोमर हैं, जो पहले भी सुर्खियों में रही थीं. साल 2011 में उन्होंने टीवी शो 'कौन बनेगा करोड़पति' में हिस्सा लेकर 50 लाख रुपए जीते थे, जिससे उनकी काफी चर्चा हुई थी. अब वही अधिकारी इस गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप में फंसी हुई हैं. यह घटनाक्रम श्योपुर जिले में राहत राशि के दुरुपयोग को लेकर चल रही जांच को और तेज करने की ओर इशारा कर रहा है.