क्या अफजल गुरु को माला पहनाई जानी चाहिए थी?, राजनाथ सिंह ने की उमर की टिप्पणी की निंदा

Global Bharat 08 Sep 2024 05:51: PM 2 Mins
क्या अफजल गुरु को माला पहनाई जानी चाहिए थी?, राजनाथ सिंह ने की उमर की टिप्पणी की निंदा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 2001 के संसद हमले के दोषी अफ़ज़ल गुरु की फांसी पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला की टिप्पणी की आलोचना की और पूछा कि क्या अलगाववादी नेता को सार्वजनिक रूप से माला पहनाई जानी चाहिए थी. रक्षा मंत्री रविवार को जम्मू के रामबन इलाके में एक सार्वजनिक रैली को संबोधित कर रहे थे.

रक्षा मंत्री ने कहा कि मैंने सुना है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला साहब ने कहा कि अफजल गुरु को फांसी नहीं दी जानी चाहिए थी. मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि अफजल गुरु को फांसी नहीं दी जानी चाहिए थी तो क्या उसे सार्वजनिक रूप से माला पहनाई जानी चाहिए थी? और ये लोग दावा करते हैं कि वे अनुच्छेद 370 को बहाल करेंगे.

हाल ही में मीडिया को दिए एक साक्षात्कार में अब्दुल्ला ने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि अफजल गुरु को फांसी देने से कोई उद्देश्य पूरा हुआ है. रक्षा मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लोग भी भारत में शामिल होना चाहेंगे, क्योंकि भारत में व्यापक विकास हो रहा है. उन्होंने कहा कि भारत पीओके के लोगों को अपना मानता है.

राजनाथ सिंह ने कहा कि मैं आप सभी से जम्मू-कश्मीर में भाजपा की सरकार बनाने का आग्रह करता हूं और जम्मू-कश्मीर में विकास देखने के बाद पीओके के लोग कहेंगे कि हम पाकिस्तान के साथ नहीं रहना चाहते हैं, हम भारत के साथ जाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लोग पीओके के लोगों को विदेशी मानते हैं, लेकिन भारत पीओके के लोगों को अपना मानता है. आइए और हमारे साथ जुड़िए.

विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस, जिसके साथ कांग्रेस पार्टी ने गठबंधन किया है, उन्होंने अपने चुनाव घोषणापत्र में अनुच्छेद 370 को बहाल करने की कसम खाई है. उन्होंने आगे कहा कि किसी में अनुच्छेद 370 को बहाल करने की हिम्मत नहीं है क्योंकि जम्मू-कश्मीर में बहुत बड़ा बदलाव हुआ है, जिसमें पथराव की एक भी घटना सामने नहीं आई है.

रक्षा मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर, जिसे पहले आतंकवाद के केंद्र के रूप में जाना जाता था, अब पर्यटन का केंद्र बन गया है. पहले कश्मीर घाटी में कई युवाओं के हाथों में पिस्तौल और रिवॉल्वर हुआ करते थे. आज जाकर बदलाव देखिए, उनके हाथों में पिस्तौल और रिवॉल्वर नहीं हैं, बल्कि आपको लैपटॉप और कंप्यूटर दिखाई देंगे. 2022 के बाद पत्थरबाजी की एक भी घटना नहीं हुई है.

घाटी के वंचित समुदाय को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पहले वाल्मीकि समुदाय को वोट देने से रोक दिया गया था, लेकिन अब वे राज्य विधानसभा चुनावों में अपने वोट के अधिकार का प्रयोग कर सकते हैं. केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में 10 वर्षों में पहला विधानसभा चुनाव होगा और अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद पहला चुनाव होगा. मतदान तीन चरणों में 18 सितंबर, 25 सितंबर और 1 अक्टूबर होंगे.

मतों की गिनती 8 अक्टूबर को होगी. कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने चुनाव पूर्व गठबंधन की घोषणा की है. हालांकि, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) चुनाव पूर्व गठबंधन का हिस्सा नहीं है और अपने दम पर चुनाव लड़ रही है. बारामुल्ला से लोकसभा चुनाव हारने वाले उमर अब्दुल्ला दो निर्वाचन क्षेत्रों-गंदेरबल और बडगाम से चुनाव लड़ रहे हैं. पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती विधानसभा चुनाव नहीं लड़ रही हैं. पीडीपी ने उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती को बिजबेहरा निर्वाचन क्षेत्र से मैदान में उतारा है.

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