अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि राम मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद महिला और पुरुष, दोनों के लिए समान रूप से खुला रहेगा. ट्रस्ट द्वारा गठित तीन सदस्यीय चयन समिति अगले एक महीने के भीतर नए CEO के नाम पर अंतिम मुहर लगा सकती है.
चयन समिति में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णु कांत चतुर्वेदी और उद्योगपति सुरेश हवारे शामिल हैं. समिति के अनुसार चयन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और योग्य उम्मीदवार की तलाश तेजी से की जा रही है.
ट्रस्ट ने साफ किया है कि नए CEO के चयन में सबसे अधिक महत्व ईमानदारी, पारदर्शिता, नेतृत्व क्षमता और निष्कलंक सार्वजनिक छवि को दिया जाएगा. उम्मीदवार में भगवान श्रीराम के प्रति गहरी आस्था होने के साथ-साथ बड़े स्तर पर प्रशासन और प्रबंधन का अनुभव भी होना चाहिए. उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी मंदिर प्रशासन को प्रभावी ढंग से संचालित करना और देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना होगी.
ट्रस्ट ने किसी विशेष पेशे या सेवा क्षेत्र को प्राथमिकता नहीं दी है. हालांकि, पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों के अनुभवी अधिकारियों के नाम भी उनकी संगठनात्मक क्षमता और अनुशासन के कारण विचाराधीन हो सकते हैं. अंतिम फैसला पूरी तरह योग्यता, अनुभव और उपयुक्तता के आधार पर लिया जाएगा.
नए CEO को जिला प्रशासन और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करने के अलावा मंदिर में आने वाले दान, वित्तीय व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यों की पारदर्शी निगरानी भी करनी होगी. ट्रस्ट ने फिलहाल अपने उपनियमों में किसी संशोधन की आवश्यकता से इनकार किया है. वहीं, CEO के वेतन और आयु सीमा पर अंतिम निर्णय चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लिया जाएगा.