लोकसभा चुनाव के बीच एक बड़ी खुशखबरी आई है. दरअसल, 33 साल बाद देश का सोना वापस आ रहा है और यह बहुत गर्व की बात है कि रिजर्व बैंक आफ इंडिया ने ब्रिटेन से सोना देश में वापस मंगा लिया है. लेकिन इस खबर के आते ही दूसरे सवाल उठने लगे हैं. लोग जानने को उत्सुक हैं कि ये सोना वापस कैसे आया? और ये रखा कहां जाएगा? समझने के लिए पूरी खबर पढ़ें.
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI ने ब्रिटेन से अपना 100 टन यानी करीब 1 लाख किलो सोना वापस मंगा लिया है. ये बड़ी बात इसलिए हैं क्योंकि यह 1991 की शुरुआत के बाद पहली बार है जब इतना ज्यादा सोना भारत के भंडार में वापस आया है. लेटेस्ट डेटा के अनुसार, मार्च 2024 के अंत तक RBI के पास कुल 822.1 टन सोना था, जिसमें से 413.8 टन विदेशों में जमा था. RBI पिछले कुछ सालों में सोना खरीदने वाले केंद्रीय बैंकों में से एक है. पिछले वित्त वर्ष में रिजर्व बैंक के सोने के भंडार में 27.5 टन सोना बढ़ा है.
अब इस सोने को धीरे-धीरे भारत लाया जा रहा है. ये एक बहुत बड़ी उपबल्धि है जो आरबीआई और भारत सरकार के नाम दर्ज होगी. क्योंकि इससे पहले किसी भी देश ने अपने सोने को विकसित देशों से वापस लाने में कामयाबी हासिल नहीं की है. अब आते हैं मुख्य सवाल पर कि आखिर कांग्रेस की सरकार में गिरवी रखा गया सोना मोदी सरकार में कैसे वापस लाया गया? चलिए इसे समझते हैं.
100 टन सोने को भारत लाने के लिए महीनों की प्लानिंग की गई और फिर पूरे प्लान को एग्जीक्यूट किया गया. प्लानिंग और एग्जीक्यूशन में वित्त मंत्रालय, RBI और सरकार की अन्य विंग के साथ लोकल अथॉरटीज शामिल रहीं. RBI को सोना भारत में लाने के लिए सीमा शुल्क में छूट मिली. लेकिन आयात पर लगने वाले इंटीग्रेटेड GST में कोई छूट नहीं दी गई. ऐसा इसलिए क्योंकि इस टैक्स को राज्यों के साथ शेयर किया जाता है. गोल्ड लाने के लिए एक स्पेशल एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल किया गया. इस कदम से RBI को कुछ स्टोरेज कॉस्ट बचाने में भी मदद मिलेगी, जिसका पेमेंट वो बैंक ऑफ इंग्लैंड को करता था.
हालांकि, यह राशि इतनी बड़ी नहीं है. हमारे देश के भीतर, मुंबई के मिंट रोड पर रिजर्व बैंक ऑफिस की पुरानी बिल्डिंग में सोना रखा जाता है. इसके अलावा पूरी सिक्योरिटी के साथ सोने का स्टोरेज नागपुर में भी वॉल्ट में किया जाता है. वर्ल्ड गोल्ड कॉउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक केंद्रीय बैंकों के पास अबतक खनन किए गए सभी सोने का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा है और साल 2023 के अंत तक भंडार 36,699 मीट्रिक टन से ज्यादा रहा होगा.
बता दें कि साल 1991 में चंद्रशेखर सरकार ने भुगतान संतुलन संकट से निपटने के लिए गोल्ड को गिरवी रख दिया था. 4 से 18 जुलाई 1991 के बीच आरबीआई ने 400 मिलियन डॉलर जुटाने के लिए बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान के पास 46.91 टन सोना गिरवी रखा था. साल 1991 में देश के पास इम्पोर्ट करने के लिए विदेशी करेंसी नहीं बची थी. तब भारत ने अपना 67 टन सोना गिरवी रखकर 2.2 अरब डॉलर का कर्ज लिया था.
पूर्व गवर्नर सी रंगराजन ने अपनी बुक में बताया है कि सरकार ने सोना गिरवी रखने का फैसला लिया था, मुंबई एयरपोर्ट पर एक चार्टर प्लेन खड़ा था. इस प्लेन में यह सोना रखवाया गया, सोने को लेकर प्लेन इंग्लैंड गया. तब भारत को कर्ज मिला. उसके बाद भारत ने गिरवी रखे सोने को छुड़वाया, उसके बाद धीरे-धीरे देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी बढ़ता गया.
केंद्रीय बैंक ने करीब 15 साल पहले अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से 200 टन सोना खरीदा था. 2009 में यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तब भारत ने अपनी परिसंपत्तियों में विविधता लाने के लिए 6.7 अरब डॉलर प्राइस का 200 टन सोना खरीदा था. यही नहीं पिछले कुछ सालों में रिजर्व बैंक की तरफ से खरीदे गए सोने के स्टॉक में लगातार बढ़ोतरी हुई है.