नई दिल्ली: ट्रांसजेंडर होना रितिका सिंह के लिए कभी कमजोरी नहीं रहा, बल्कि ताकत बन गया. राजस्थान के टोंक जिले के मालपुरा क्षेत्र की रहने वाली रितिका सिंह ने आगरा में आयोजित समर आइस स्टॉक चैंपियनशिप-2025 में स्वर्ण पदक जीतकर एक बार फिर साबित कर दिया कि अगर मौका मिले तो कोई भी बाधा नामुमकिन नहीं होती.
यह पहला मौका नहीं जब रितिका ने सुर्खियां बटोरी हों. साल 2024 में गुलमर्ग (जम्मू-कश्मीर) में हुई नेशनल आइस स्टॉक चैंपियनशिप में भी उन्होंने एक गोल्ड, एक सिल्वर और दो ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश की पहली ट्रांसजेंडर पदक विजेता होने का गौरव हासिल किया था. उससे पहले 2023 में भी उन्होंने इसी खेल में रजत और कांस्य पदक अपने नाम किए थे.
रितिका बताती हैं, “12वीं के बाद मुझे लगा कि मेरी बॉडी और मन में कुछ अलग हो रहा है. हार्मोन सही तरीके से काम नहीं कर रहे थे. परिवार ने समझा और साथ दिया. 2021 से 2023 तक जेंडर रिअसाइनमेंट की पूरी प्रक्रिया चली.” लेकिन गांव में यह बात फैली तो तंज कसने वालों की कमी नहीं थी. आखिरकार रितिका ने घर-गांव छोड़ दिया और जयपुर आ गईं. यहीं उनकी मुलाकात आइस स्टॉक खेल से हुई. बर्फ पर खेले जाने वाले इस खेल ने उन्हें नई जिंदगी दी.
“शुरुआत में बहुत मुश्किलें आईं, लेकिन मैंने हार नहीं मानी. आज वही लोग जो ताने मारते थे, मेरे नाम से पहचाने जाते हैं,” रितिका मुस्कुराते हुए कहती हैं. रितिका का सपना अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का झंडा बुलंद करना है. वे कहती हैं, “ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों के लिए खेल कोटा होना चाहिए. केंद्र और राज्य सरकारें नीति बनाएं ताकि हम जैसे हजारों युवा आगे आ सकें. अगर मुझे और मेरे जैसे लोगों को मौका मिलेगा तो हम ओलंपिक तक में मेडल ला सकते हैं.”
रितिका के पिता छोटी-सी दुकान चलाते हैं, मां गृहिणी हैं. तीन भाई-बहनों में रितिका दूसरे नंबर पर हैं. बड़ा भाई और छोटी बहन है. परिवार ने कभी पीठ नहीं दिखाई. आज जब रितिका मेडल जीतकर लौटती हैं तो पूरा मोहल्ला गर्व से सीना तान लेता है. कभी ताने मारने वाले अब तारीफ करते नहीं थकते.
राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री कन्हैयालाल चौधरी और पूर्व टोंक कलेक्टर सौम्या झा ने भी रितिका को सम्मानित किया था. अब एक बार फिर पूरा राजस्थान उनकी इस नई उपलब्धि पर जश्न मना रहा है. रितिका सिंह सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, लाखों ट्रांसजेंडर युवाओं के लिए जीता-जागता सबक हैं कि हौसला हो तो पहचान कभी बंधन नहीं बनती.