नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. इस प्रक्रिया के दौरान करीब 27 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे. लोगों ने दावा और आपत्तियां दायर कीं. चुनाव आयोग द्वारा गठित न्यायाधिकरणों ने अब तक 82,782 अपीलों का निपटारा किया है, जिनमें से 91 प्रतिशत यानी 75,443 नाम वापस वोटर लिस्ट में जोड़ दिए गए हैं. सिर्फ 8.86 प्रतिशत (7,339) दावे खारिज हुए.
यह आंकड़ा सामने आते ही कांग्रेस पार्टी ने हमला बोल दिया. पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मिलकर पश्चिम बंगाल में SIR करवाया और वोट चोरी की. कांग्रेस ने अपने आधिकारिक हैंडल पर लिखा कि चुनाव से पहले नाम काटे गए और बाद में वापस जोड़ दिए गए. यह मोदी और ज्ञानेश कुमार का वोट चोरी सिस्टम है.
कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी ने आरटीआई जवाब का हवाला देते हुए कहा कि SIR में 27,28,500 लोगों को अयोग्य घोषित किया गया, लेकिन 38,10,620 अपीलें दाखिल हुईं. यानी अतिरिक्त अपीलें भी दर्ज हुईं. उन्होंने कहा कि 91% नाम वापस जुड़ना साबित करता है कि शुरुआत में योग्य और असली मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए थे. इससे कई नागरिक डर और अनिश्चितता में जी रहे हैं, सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा और रोजगार के लिए विदेश भी नहीं जा पा रहे.
कांग्रेस नेता प्रसेनजित बोस ने बताया कि हटाए गए 27 लाख में से सिर्फ 7 लाख लोगों ने खुद अपील की, बाकी अपीलें सामूहिक रूप से की गईं. पार्टी ने कोलकाता और हावड़ा नगर निगम चुनावों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट से इन अपीलों के निपटारे के लिए समयबद्ध सीमा तय करने का अनुरोध किया है. जिलावार आंकड़ों में मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर और दक्षिण 24 परगना समेत कई जगहों पर ज्यादातर नाम बहाल किए गए हैं.