जब हिंदुस्तान की मीडिया इस बात पर चर्चा कर रही थी कि पीएम मोदी SCO समिट में हिस्सा लेने पाकिस्तान जाएंगे या नहीं, जब पाकिस्तान की मीडिया ये कह रही थी कि मोदी हमारे आसमान से कुछ दिन पहले ही लौटकर गए हैं, इसलिए एक बार फिर आएंगे, उसे तगड़ा झटका तब चला जब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत-पाकिस्तान के रिश्तों पर फाइनल रिलेशन रिपोर्ट पेश कर दी, और ये ऐसी रिपोर्ट है, जिसे पढ़कर दुनियाभर के पाकिस्तान परस्त देशों की हवा खराब हो जाएगी. जयशंकर ने क्या कहा आप भी पहले सुनिए, फिर बताते हैं उन्होंने ऐसा क्यों कहा.
पड़ोसियो से समस्या लगातार बनी रहती है. लोग कई बार कहते हैं कि बांग्लादेश में ये हो रहा है, मालदीव में वो हो रहा है. मैं कहता हूं कि उन्हें पूरी दुनिया में देखने की जरूरत है कि ऐसे कौन से देश हैं, जिनकी अपने पड़ोसी मुल्कों के साथ चुनौतियां नहीं हैं. मुझे लगता है कि पड़ोसियों का ये नेचर होता है कि उनके साथ रिश्ते हमेशा एक जैसे नहीं रहते. पाकिस्तान के साथ बातचीत का दौर अब बीत चुका है. ये याद रखने की जरूरत है कि हर एक्शन पर रिएक्शन होता ही है.
जयशंकर इसके आगे ये भी कहते हैं आर्टिकल 370 को हटाया जा चुका है, और अब मुद्दा ये है कि पाकिस्तान से रिश्ते कैसे होंगे, तो पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दिया जाएगा, इसका मतलब साफ है कि जो पाकिस्तान भारत के खिलाफ चालें चलता है, जो भारत में घुसपैठ करवाने की कोशिश करता है, अब उसे डिप्लोमैटिक नहीं बल्कि सेना के स्तर पर जवाब दिया जाएगा और पहले से भी दिया जा रहा है. लेकिन समझने वाली बात ये है कि जयशंकर ने इस वक्त ये बयान क्यों दिया, वो दिल्ली में एक किताब का विमोचन करने गए थे, इस दौरान ये बयान दिया, ये बयान ऐसे वक्त में आया है, जब 24 घंटे पहले ही पाकिस्तान से मोदी को एससीओ समिट में हिस्सा लेने के लिए न्यौता आया है. इंटरनेशनल मामलों के जानकार कहते हैं.
अभी पाकिस्तान को कड़क भाषा में जवाब देने की जरूरत है. जम्मू-कश्मीर में आने वाले दिनों में चुनाव होने हैं, और वहां के कई नेता ये दोहरा रहे हैं कि हमारी सरकार आई तो 370 वापस ले आएंगे. पाकिस्तान भी यही चाहता है कि 370 वापस लाकर जम्मू-कश्मीर में पहले जैसी स्थिति हो जाए, ताकि वो कश्मीर-कश्मीर का राग अलापता रहे.
पर जयशंकर ने सख्त भाषा का इस्तेमाल करके ये बता दिया कि 370 तो भूल ही जाओ, पाकिस्तान से रिश्ते भी अब पहले जैसे होने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि हम उसकी शर्तों पर समझौता करेंगे नहीं और पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज आएगा नहीं. अगर पाकिस्तान को रिश्ते सुधारने होते हैं, वो असल में बातचीत का पैरोकार होता तो शांति की पहल करता, घुसपैठियों को रोकता, हाफिज जैसे लोगों को भारत को सौंपता. लेकिन पाकिस्तान सबूत देने या डोजियर सौंपने के बाद भी यही कहता है कि हम तो उसे जानते ही नहीं है. वो हमारे यहां है ही नहीं. ऐसे में पाकिस्तान का इलाज क्या होना चाहिए, ये आपको भी बताना चाहिए.