संभल : उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 1978 के साम्प्रदायिक दंगों के दौरान अपनी दुकान पर बैठे रामशरण रस्तोगी की दंगाइयों द्वारा हत्या कर दी गई थी. इस घटना के बाद भय और असुरक्षा के चलते रस्तोगी परिवार ने शहर छोड़कर दिल्ली में पलायन कर लिया था. लंबे समय तक यह परिवार अपने मूल शहर से दूर रहा, लेकिन हाल के वर्षों में प्रशासन द्वारा शांति और पुनर्वास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बीच पुराने पीड़ित परिवारों को वापस बसाने की पहल शुरू हुई.
2024 में हुई हिंसा के बाद राज्य सरकार ने 1978 के दंगा पीड़ित परिवारों को फिर से संभल में बसाने की योजना पर काम शुरू किया. इसी क्रम में 2025 में रस्तोगी परिवार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और शहर में पुनः बसने की इच्छा जताई. मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने दंगा पीड़ित परिवारों के लिए रिहायशी भूमि के पट्टे तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अधिकारियों के अनुसार पात्र परिवारों को चिन्हित कर उन्हें आवश्यक भूमि उपलब्ध कराई जाएगी.
इस पहल के बाद रामशरण रस्तोगी का परिवार एक बार फिर संभल में अपनी नई शुरुआत करने की तैयारी कर रहा है, जिससे वर्षों पुराना विस्थापन समाप्त होने की उम्मीद जताई जा रही है. प्रशासनिक स्तर पर इस पुनर्वास को सामाजिक समरसता और भरोसे की बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. स्थानीय लोग इसे सकारात्मक बदलाव के रूप में देख रहे हैं.