रियाद/इस्लामाबाद: सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष एक बार फिर भड़क उठा है. दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमले का आरोप लगा रहे हैं. इस तनाव के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि पिछले साल दोनों देशों के बीच NATO स्टाइल डिफेंस पैक्ट साइन हुआ था. हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के अब्हा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए. इसके जवाब में सऊदी अरब ने यमन के सना हवाई अड्डे पर हमला किया.
हूती इस हमले को अमेरिका समर्थित बता रहे हैं. पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच सितंबर 2025 में साइन हुए डिफेंस पैक्ट के तहत एक देश पर हमला दूसरे पर हमला माना जाएगा. पाकिस्तान ने पहले ही 8,000 सैनिक, 16 फाइटर जेट और चाइनीज एयर डिफेंस सिस्टम सऊदी अरब में तैनात कर रखा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को "गार्जियन" बनने की बात कही और 20% शुल्क लगाने का ऐलान किया, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है.
पाकिस्तान फिलहाल बालोचिस्तान में विद्रोह, अफगानिस्तान सीमा पर तनाव और POK में अशांति से जूझ रहा है. अगर सऊदी अरब पर हमले बढ़े तो पाकिस्तान को पैक्ट का सम्मान करना पड़ेगा. यह टकराव मध्य पूर्व में नया मोर्चा खोल सकता है. पाकिस्तान के लिए यह Catch-22 स्थिति है. सऊदी के साथ वादा निभाना या घरेलू संकट संभालना.