नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत में शुक्रवार को एक बेहद अशोभनीय घटना घटी. इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने जजों पर कागज फेंक दिए, गाली-गलौज की और CJI को आदेश देने जैसी बातें कहीं. आखिरकार सुरक्षा कर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा और उसे ज़बरदस्ती कोर्ट रूम से बाहर निकाल दिया गया.
जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच के सामने यह मामला आया था. याचिकाकर्ता खुद अपनी केस की पैरवी कर रहा था. सुनवाई शुरू होते ही वह आक्रामक हो गया और बोला, ''मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट, मैं आपको ACP लखनऊ के खिलाफ FIR दर्ज करने का ऑर्डर देता हूं.''
जब जस्टिस विश्वनाथन ने पूछा कि वह जजों को ऑर्डर दे रहा है, तो याचिकाकर्ता और उत्तेजित हो गया. उसने फाइल हवा में उछाल दी और गालियां देते हुए कहा कि इसे CJI को दे दो. इस पर बेंच ने तुरंत सुरक्षा स्टाफ को बुलाया और आरोपी को कोर्ट रूम से बाहर निकालने का आदेश दे दिया.
यह घटना कुछ महीने पहले पूर्व CJI बी.आर. गवई की बेंच पर हुई एक समान घटना की याद दिलाती है, जिसमें एक वकील पर भी अवमानना की कार्रवाई हुई थी. सुप्रीम कोर्ट की गरिमा बनाए रखने के लिए अदालतें ऐसे मामलों में सख्ती बरत रही हैं. इस याचिकाकर्ता के खिलाफ भी अवमानना की कार्यवाही हो सकती है.