लखनऊ : शामली के चर्चित आयुष मलिक धर्मांतरण मामले में 16 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई. अदालत के सामने पेश आयुष मलिक ने कहा कि उसने अपनी इच्छा से इस्लाम धर्म अपनाया था और अपनी मर्जी से चांदनी कुरैशी से निकाह किया, इसके बाद हाईकोर्ट ने उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को मानते हुए उसे अपनी इच्छा के अनुसार रहने और धर्म चुनने की छूट दी.
दरअसल, आयुष के दोस्त मोहम्मद सुल्तान की ओर से हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की गई थी. याचिका में आरोप लगाया गया था कि धर्म परिवर्तन और चांदनी से निकाह के बाद आयुष को उसके परिवार की ओर से कथित तौर पर उसकी इच्छा के विरुद्ध रखा गया है. हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आयुष को 16 सितंबर को अदालत में पेश करने का निर्देश दिया था.
इस पूरे विवाद की शुरुआत जून 2026 में हुई थी. आयुष के पिता देवराज मलिक ने शामली कोतवाली में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि चांदनी कुरैशी और उसके परिवार ने आयुष का धर्म परिवर्तन कराया. पुलिस ने चांदनी, उसके पिता और अन्य लोगों के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था. मामले में कई गिरफ्तारियां भी हुई थीं.
वहीं, आयुष की ओर से अदालत में यह स्पष्ट किया गया कि धर्म परिवर्तन और निकाह उसकी अपनी इच्छा से हुआ था. हाईकोर्ट के सामने उसके बयान के बाद अदालत ने उसकी स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी. रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने पुलिस को आयुष की स्वतंत्र इच्छा में हस्तक्षेप नहीं करने का निर्देश दिया है.
इस फैसले के बाद शामली का यह चर्चित मामला एक बार फिर सुर्खियों में है. कोर्ट की कार्यवाही में फिलहाल केंद्र में आयुष की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और उसके स्वयं लिए गए फैसले रहे.