नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के होटलियर्स के एक संघ ने पड़ोसी देश में चल रहे राजनीतिक उथल-पुथल को देखते हुए सिलीगुड़ी और उसके आसपास बांग्लादेशी नागरिकों को अस्थायी रूप से ठहरने की सुविधा प्रदान करना बंद करने का फैसला किया है. ग्रेटर सिलीगुड़ी होटलियर्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा हाल ही में जारी एक नोटिस के अनुसार, यह निर्णय उन घटनाओं से जुड़ा है जिन्होंने भारत-बांग्लादेश संबंधों को तनावपूर्ण बनाया है, जिसमें भारतीय झंडे के कथित अपमान और बांग्लादेशी नागरिकों के एक वर्ग द्वारा उत्तेजक बयान शामिल हैं.
होटलियर्स संगठन ने कहा कि वर्तमान संवेदनशील माहौल में मेहमानों और होटल स्टाफ की सुरक्षा एवं कल्याण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है. उत्तर बंगाल में अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट स्थित सिलीगुड़ी और सामरिक रूप से संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जो मुख्य भूमि भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है. बांग्लादेशी आगंतुकों के लिए भारत आने का प्रमुख प्रवेश द्वार रहा है, जो पर्यटक, चिकित्सा और छात्र वीजा पर यात्रा करते हैं.
संघ ने कहा कि स्थिति के विकास के आधार पर इस प्रतिबंध की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी, तथा “एक बार स्थिति सुरक्षित और सम्मानजनक मानी जाने पर ठहरने की सुविधाएं बहाल करने की संभावना है”. सदस्य होटलों से अपील की गई है कि वे संघ में एकरूपता और एकजुटता बनाए रखने के लिए इस निर्णय का सख्ती से पालन करें.
सूत्रों के अनुसार, संघ के सिलीगुड़ी और आसपास के लगभग 180 सदस्य होटल हैं, जो सभी इस निर्णय का पालन कर रहे हैं. इसके अलावा लगभग 50 अन्य होटल, जो संघ के सदस्य नहीं हैं, भी स्वेच्छा से इस प्रतिबंध का पालन करना शुरू कर चुके हैं. पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के होटलियर भी इसी तरह का कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं.
मालदा होटल ओनर्स एसोसिएशन, जिसमें लगभग 250 सदस्य होटल हैं, के सूत्रों के अनुसार बांग्लादेशी नागरिकों को ठहराने पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर चर्चा के लिए बैठक आयोजित करने की संभावना है.