नई दिल्ली: सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. सोहराबुद्दीन के छोटे भाई नायबुद्दीन शेख ने 21 पुलिसकर्मियों समेत सभी आरोपियों को बरी करने वाले फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया है.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 7 मई को निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा था कि अभियोजन पक्ष मामले को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा. हाईकोर्ट ने पाया कि मामला परिस्थितिजन्य सबूतों पर आधारित है और इसकी कई कड़ियां टूटी हुई हैं.
क्या है पूरा मामला?
2005 में गुजरात के गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या का आरोप है. अभियोजन के अनुसार, 22-23 नवंबर 2005 को हैदराबाद से यात्रा के दौरान उन्हें हिरासत में लिया गया.
26 नवंबर को अहमदाबाद के पास कथित एनकाउंटर में सोहराबुद्दीन मारे गए. तीन दिन बाद कौसर बी और 2006 में प्रजापति की भी कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या हो गई. बरी किए गए 22 आरोपियों में गुजरात और राजस्थान पुलिस के 21 अधिकारी शामिल थे.
दिसंबर 2018 में मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने सभी को बरी कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने पहले जांच सीबीआई को सौंपी थी और मुकदमा मुंबई ट्रांसफर किया था. कई गवाह अभियोजन के खिलाफ हो गए थे. नायबुद्दीन शेख की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर दोबारा गौर करेगा.