सोनिया गांधी का आरोप: महिलाओं का आरक्षण नहीं, परिसीमन है संसद के विशेष सत्र का असली मकसद

Amanat Ansari 13 Apr 2026 01:43: PM 2 Mins
सोनिया गांधी का आरोप: महिलाओं का आरक्षण नहीं, परिसीमन है संसद के विशेष सत्र का असली मकसद

नई दिल्ली: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार द्वारा 16 से 18 अप्रैल तक बुलाए जा रहे संसद के विशेष सत्र को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने दावा किया कि इस विशेष सत्र का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि परिसीमन (Delimitation) संबंधी प्रस्तावित बदलाव है, जिसे वह संविधान पर हमला और अत्यंत खतरनाक बता रही हैं.

द हिंदू में प्रकाशित अपने एक ओपिनियन लेख में सोनिया गांधी ने कहा कि सरकार परिसीमन के जरिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी कर रही है, जो संवैधानिक सिद्धांतों को नुकसान पहुंचा सकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों के पुनर्निर्धारण का यह प्रक्रिया सिर्फ आंकड़ों पर आधारित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें सभी राज्यों के बीच राजनीतिक निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए.

महिलाओं के आरक्षण पर सरकार की नई पहल

सोनिया गांधी ने याद दिलाया कि 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम में महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई आरक्षण देने का प्रावधान है. मूल कानून के अनुसार यह आरक्षण अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद लागू होना था. हालांकि, अब सरकार इस कानून में संशोधन कर आरक्षण को 2011 की जनगणना पर आधारित करना और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू करने की योजना बना रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर इस संशोधन के लिए समर्थन मांगा है.

सोनिया गांधी का आरोप

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी महिलाओं के आरक्षण के मुद्दे को उठाकर असल में जाति जनगणना को टालने और पश्चिम बंगाल, असम, पुडुचेरी तथा तमिलनाडु के आगामी विधानसभा चुनावों में राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि विशेष सत्र की असाधारण जल्दबाजी से साफ है कि सरकार विपक्ष को बैकफुट पर डालना और राजनीतिक Narrative को अपने पक्ष में मोड़ना चाहती है. उन्होंने प्रधानमंत्री पर सच को आधा-अधूरा बताने का भी आरोप लगाया और इसे मेरी मर्जी या सड़क वाली शैली की सरकार बताया.

जनगणना और परिसीमन पर सवाल

सोनिया गांधी ने जनगणना में हो रही देरी पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि 2021 की जनगणना को टाल दिया गया था, जिससे कई कल्याणकारी योजनाओं पर असर पड़ा. अब जबकि डिजिटल जनगणना से मुख्य आंकड़े 2027 तक उपलब्ध हो सकते हैं, तब सरकार परिसीमन को लेकर इतनी जल्दबाजी क्यों कर रही है, यह सवाल उन्होंने उठाया. उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी परिसीमन जनगणना के पूरा होने के बाद ही होना चाहिए और इसमें उन राज्यों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया है.

OBC आरक्षण की मांग

कांग्रेस नेता ने महिलाओं के आरक्षण कानून में अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए मौजूद कोटा-के-भीतर-कोटा की तरह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए भी आरक्षण का प्रावधान करने की मांग दोहराई. उन्होंने कहा कि सरकार इसके बजाय व्यापक परामर्श करे और कोई भी संवैधानिक संशोधन मानसून सत्र में लाए.

सोनिया गांधी ने सरकार से विशेष सत्र का पूरा एजेंडा स्पष्ट करने की मांग की और कहा कि अभी तक सांसदों के साथ कोई औपचारिक प्रस्ताव साझा नहीं किया गया है. उन्होंने विपक्ष की मांग को दोहराते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल चुनाव (29 अप्रैल) के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए.

अपने लेख में सोनिया गांधी ने निष्कर्ष निकाला कि सरकार का वर्तमान दृष्टिकोण गहराई से दोषपूर्ण और लोकतंत्र-विरोधी है, जो मुश्किल समय में Narrative प्रबंधन से प्रेरित लगता है. उन्होंने फिर दोहराया कि संसद के विशेष सत्र का असली मुद्दा परिसीमन है, महिलाओं का आरक्षण नहीं. यह लेख महिलाओं के आरक्षण पर फिर से चर्चा शुरू होने के बीच आया है, जब प्रधानमंत्री मोदी सभी दलों से समर्थन मांग रहे हैं.

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