ये कहानी है IPS रोहन प्रमोद बोत्रे की...CM योगी के बुलडोजर और IPS रोहन की ईमानदारी का एक दिलचस्प किस्सा है, मुख्तार अंसारी की 160 करोड़ की प्रॉपर्टी पर बुलडोजर चलवाने वाले तात्कालीन गाजीपुर SSP रोहन प्रमोद बोत्रे की कहानी फिल्म सिंघम से भी अलग है!
फिल्म सिंघम में एक पुलिसवाला गुस्से में सिस्टम को सुधारना चाहता है, लेकिन पुलिस विभाग के क्रप्ट अधिकारी उस बाहुबाली नेता के साथ होते हैं, कुछ ऐसी ही कहानी है IPS रोहन की...IPS रोहन प्रमोद बोत्रे की कहानी एक दिन DGP प्रशांत कुमार ने CM योगी की टेबल तक पहुंचाई, वहां से तय हुआ कि मुख्तार अंसारी की बर्बादी की कहानी यही हीरो लिख सकता है! SSP रोहन अपनी पोस्टिंग का पेपर लेकर गाज़ीपुर SSP कार्यालय पहुंचते हैं, वो एक इंटरव्यू में कई राज़ से पर्दा उठाते हैं...वो कहते हैं...
"2022 में कासगंज से ट्रांसफर होकर मैं गाजीपुर पहुंचा था...मेरे सामने कई केस थे लेकिन मैंने सबसे पहले मुख्तार अंसारी की ही फाइलें खोली...यहां मैंने सबसे पहले मुख्तार की ही फाइलें चेक करनी शुरू की...मुख्तार पर जमीनों पर अवैध कब्जे, बिना नक्शा पास तमाम इमारतें बनवाने, कॉमर्शियल बिल्डिंग्स से अवैध तरीके से किराया वसूलने के कई मुकदमे दर्ज थे...प्रॉपर्टी सिर्फ गाजीपुर में ही नहीं थीं...मुख्तार की प्रॉपर्टी का कारोबार मऊ से लेकर लखनऊ तक में फैला हुआ था…इस प्रॉपर्टी को मुख्तार के भाई अफजाल अंसारी या उसके गुर्गे रन कर रहे थे…इसकी हिस्सेदारी मुख्तार के परिवार को भी जाती थी…मैंने सबसे पहले इन अवैध संपत्तियों पर कोर्ट से ऑर्डर लेकर कार्रवाई शुरू की…जैसे ही मैंने गाजीपुर में मुख्तार की एक आलीशान बिल्डिंग पर बुलडोजर चलवाया, चारों तरफ से विरोध के सुर उठने लगे...कभी उसके गुर्गों के फोन आए तो कभी कुछ नेताओं के फोन...एक बात और समझ में आई कि स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी अभी भी मुख्तार के बहुत दबाव में थे... हालांकि, मैंने उन्हें कानून का हवाला देकर शांत कर दिया और एक्शन जारी रखा। इस दौरान एक बार तो मुख्तार के भाई और तत्कालीन सांसद अफजाल अंसारी से तीखी बहस भी हुई...लेकिन चार महीने में ही गाजीपुर, लखनऊ, मऊ जिलों में मैंने मुख्तार की 150 करोड़ की प्रॉपर्टी या तो कुर्क कर दी या फिर उन पर बुलडोजर चलवा दिया। हालांकि पुलिस महकमे में भी कुछ लोग उसकी सरपरस्ती करने वाले थे...जैसे ही मैं उसकी किसी प्रॉपर्टी के खिलाफ एक्शन लेने की तैयारी करता था, उसके चाहने वालों को सूचना मिल जाती थी...हमारे पास कार्रवाई न करने के लिए फोन आने लगते थे...मैंने किसी की एक न सुनी और अपना एक्शन जारी रखा...शायद इसलिए मैं वहां ज्यादा दिन तक नहीं रह पाया...चार महीने बाद ही मेरा ट्रांसफर लखनऊ कर दिया गया...यहां कुछ दिन रहने के बाद बाद अब मैं दिल्ली आईबी में हूं...यहां भी काम के अपने अलग तरह के चैलेंज हैं...."
सितंबर 1987 में महाराष्ट्र के पुणे में जन्मे रोहन की पढ़ाई पुणे के NCL स्कूल में ही हुई..सिविल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन कंपलीट कर लिया...इंजीनियरिंग करने के बाद ही IPS रोहन अमेरिका गए, पर वहां दिल नहीं लगा, उन्होंने देखा कि भारत और अमेरिका के सिस्टम में बड़ा फर्क है, वो अमेरिका जैसी व्यवस्था को भारत में लागू करने का सपना देखने लगे, और अचानक करोड़ों की नौकरी छोड़ दी..वापस दिल्ली आए तो सबने कहा फैसला गलत है, लेकिन रोहन ने तैयारी शुरू की...साल 2016 में रोहन का सलेक्शन UPSC में हो गया...187 रैंक हासिल करने के बाद रोहन ने IPS बनने का फैसला किया, जबकि इस रैंक पर आप IFS भी बन सकते थे...यानि शांति की नौकरी, लेकिन रोहन ने IPS बनने का फैसला किया और बन गए…. तो सवाल उठता है कि वो कौन है जिसने मुख्तार की कार्रवाई देखकर IPS रोहन का तबादला करवा दिया? या योगी सरकार पर भी किसी ने दबाव डाला था? क्योंकि SSP के तबादले के अधिकार तो राज्य सरकार के पास ही होता है? फिर IPS रोहन को सिर्फ चार महीने में क्यों हटाया गया? मुख्तार अंसारी का नेटवर्क पूरी तरह से चल रहा था, यहां तक पुलिसवाले ने ही पुलिसवालों के इकबाल पर सवाल खड़े किए हैं, इसका मतलब ये है कि मुख्तार का परिवार जितना मासूम बना रहा है वो है नहीं! IPS रोहन को हम इसलिए सलाम करते हैं क्योंकि उनकी ईमानदारी ने सिस्टम का एक हिस्सा तो सुधार ही दिया...