नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे परिवार को राहत दी है, जिसे भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी होने के बावजूद देश से निकाला जा रहा था. कोर्ट ने छह कथित पाकिस्तानी नागरिकों को पाकिस्तान भेजने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी. यह मामला पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ था. कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे अपने मामले को संबंधित अधिकारियों के सामने रखें.
याचिकाकर्ता अहमद तारिक बट, जो बेंगलुरु में रहते हैं और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में जन्मे हैं, ने कोर्ट को बताया कि उनके परिवार को जबरन अटारी-वाघा बॉर्डर पर ले जाया जा रहा था. उन्होंने कहा कि उनके पास वैध भारतीय दस्तावेज हैं, जिनमें विदेश मंत्रालय द्वारा जारी पासपोर्ट भी शामिल हैं. फिर भी, उन्हें बॉर्डर पर हिरासत में लिया गया.
परिवार की कहानी
तारिक बट ने कोर्ट को बताया, "हमारा परिवार छह लोगों का है. मेरे दो भाई बेंगलुरु में काम करते हैं. मेरे माता-पिता, बहन और एक अन्य भाई श्रीनगर में रहते हैं." तारिक के पिता पीओके के मीरपुर से हैं, जबकि उनकी माता का जन्म श्रीनगर में हुआ था. तारिक ने बताया कि वे 1997 तक मीरपुर में रहते थे, जिसके बाद वे बॉर्डर पार करके श्रीनगर आ गए. इसके बाद वे कई सालों तक कश्मीर घाटी में रहे और अब बेंगलुरु में रहते हैं.
तारिक ने आईआईएम कोझिकोड से मैनेजमेंट की डिग्री हासिल की है और वर्तमान में बेंगलुरु की एक आईटी कंपनी में काम करते हैं. उनके परिवार में उनकी बहन आयशा तारिक और भाई अबूबकर तारिक व उमर तारिक बट शामिल हैं. उनके पासपोर्ट में जन्मस्थान श्रीनगर दर्ज है.
गलत दावों का खंडन
याचिका के अनुसार, फॉरेनर्स रीजनल ऑफिसर (एफआरओ) ने गलत दावा किया कि तारिक और उनका परिवार 1997 में पाकिस्तानी वीजा पर भारत आए थे और वीजा खत्म होने के बाद उन्हें देश छोड़ना होगा. तारिक ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि वे कभी पाकिस्तानी नागरिक नहीं थे और न ही कभी वीजा पर भारत आए. उनके पास भारतीय पासपोर्ट और आधार कार्ड जैसे वैध दस्तावेज हैं, जो उनकी भारतीय नागरिकता को साबित करते हैं.
पहलगाम हमले के बाद सरकार का निर्देश
यह मामला उस समय सामने आया जब केंद्र सरकार ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सख्त कदम उठाए. इस हमले में 26 लोग मारे गए थे. सरकार ने अल्पकालिक वीजा पर भारत में रह रहे सभी पाकिस्तानी नागरिकों को देश छोड़ने या कार्रवाई का सामना करने का निर्देश दिया था. इसी निर्देश के तहत तारिक और उनके परिवार को डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी.
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने तारिक और उनके परिवार की याचिका पर सुनवाई करते हुए डिपोर्टेशन पर अंतरिम रोक लगा दी. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को अपने दस्तावेजों और दावों को सही प्राधिकरण के सामने पेश करने का मौका मिलना चाहिए. यह फैसला भारतीय दस्तावेजों के आधार पर नागरिकता के दावे और आतंकवाद से जुड़े मामलों में सावधानी बरतने के बीच संतुलन को दर्शाता है.
परिवार को उम्मीद
तारिक और उनके परिवार को सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से बड़ी राहत मिली है. यह मामला न केवल उनकी नागरिकता के सवाल को उठाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारतीय दस्तावेजों के बावजूद कुछ लोगों को अपनी पहचान साबित करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. इस मामले की अगली सुनवाई और संबंधित अधिकारियों के फैसले पर अब सबकी नजर है.