सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, ताकि यह जांचा जा सके कि तिरुपति लड्डू बनाने में क्या पशु वसा का उपयोग किया जा रहा था. कोर्ट ने कहा कि, इस मामले में करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं. पांच सदस्यीय SIT में CBI, पुलिस और FSSAI के कर्मी शामिल होंगे, जो इस मामले की पूरी जांच करेंगे.
तिरुपति लड्डू विवाद के बारे में, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि, अगर आरोपों में जरा भी सच्चाई है, तो यह अस्वीकार्य है. उन्होंने सुझाव दिया कि SIT जांच का नेतृत्व एक टॉप सरकारी अधिकारी करें. ताकि यह तय किया जा सके कि जांच राज्य द्वारा नियुक्त SIT द्वारा की जाए या एक स्वतंत्र निकाय द्वारा.
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कई याचिकाओं के बाद आया, जिनमें से एक में तिरुपति मंदिर में प्रसाद लड्डू बनाने में सूअर की चर्बी के उपयोग की शिकायत की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि, वह अदालत को राजनीतिक लड़ाई का मैदान नहीं बनने देगा. इस महीने की शुरुआत में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया था कि, तिरुपति के लड्डू पशु वसा का उपयोग करके बनाए गए थे, जो कि पिछले जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाले प्रशासन के दौरान हुआ था.
आपको बता दें, पिछली सुनवाई के दौरान, मुख्यमंत्री नायडू द्वारा की गई सार्वजनिक टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया. कोर्ट ने कहा कि लैब की रिपोर्ट बिल्कुल साफ नहीं है. अदालत ने यह भी पूछा कि तिरुपति मंदिर में लड्डू बनाने के लिए संदिग्ध घी का उपयोग करने का क्या सबूत है.
पिछली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- क्या सबूत है कि लड्डू बनाने में दूषित घी का इस्तेमाल हुआ सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, 'जुलाई में लैब रिपोर्ट आई. वह स्पष्ट नहीं है. मुख्यमंत्री SIT जांच के आदेश देते हैं और फिर सितंबर में मीडिया के सामने बयान देते हैं. एक संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति ऐसा कैसे कर सकता है.'
सुप्रीम कोर्ट ने तिरुपति मंदिर की ओर से पेश हुए अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा से पूछा- इस बात के क्या सबूत हैं कि लड्डू बनाने में दूषित घी का उपयोग किया गया था. इस पर वकील ने कहा कि, हम जांच कर रहे हैं. इसके बाद जस्टिस गवई ने पूछा, 'फिर तुरंत प्रेस में जाने की क्या जरूरत थी? आपको धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए.'