छात्र आत्महत्याओं को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ये दिशा-निर्देश आपको जरूर जान लेनी चाहिए...

Amanat Ansari 26 Jul 2025 12:15: PM 2 Mins
छात्र आत्महत्याओं को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ये दिशा-निर्देश आपको जरूर जान लेनी चाहिए...

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने भारत में स्कूलों, कॉलेजों, कोचिंग सेंटरों, विश्वविद्यालयों, प्रशिक्षण संस्थानों और हॉस्टलों में बढ़ती छात्र आत्महत्याओं को रोकने के लिए 15 दिशानिर्देश जारी किए हैं. कोर्ट ने कहा कि पढ़ाई का तनाव, परीक्षा का दबाव और संस्थानों में समर्थन की कमी के कारण कई छात्र आत्महत्या कर रहे हैं.

  • मानसिक स्वास्थ्य सहायता: हर संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य काउंसलर होने चाहिए. छोटे-छोटे समूहों में छात्रों को मेंटर या काउंसलर दिए जाएँ, खासकर परीक्षा या नए सत्र के दौरान, जो गोपनीय और अनौपचारिक मदद दे सकें.
  • शिक्षकों और कर्मचारियों का प्रशिक्षण: सभी शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को साल में दो बार मानसिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण लेना होगा. इसमें तनाव के लक्षण पहचानना, आत्म-नुकसान के मामलों में मदद करना और सही रेफरल प्रक्रिया सिखाई जाएगी.
  • सभी के साथ समान व्यवहार: कर्मचारियों को कमजोर और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के छात्रों के साथ संवेदनशील और भेदभाव-मुक्त व्यवहार करना सिखाया जाए.
  • शिकायत समाधान समिति: संस्थानों में यौन उत्पीड़न, रैगिंग और अन्य शिकायतों के लिए आंतरिक समितियाँ बनें. प्रभावित छात्रों को मानसिक और सामाजिक सहायता दी जाए.
  • जागरूकता और जीवन कौशल: माता-पिता के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएँ. छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और जीवन कौशल सिखाने के लिए गतिविधियां शुरू हों.
  • हेल्पलाइन नंबर: आत्महत्या रोकथाम हेल्पलाइन नंबर, जैसे टेली-मैनस, को हॉस्टल, कक्षा, आम क्षेत्रों और वेबसाइटों पर बड़े और साफ अक्षरों में प्रदर्शित करना होगा.
  • गोपनीय रिकॉर्ड: छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य स्थिति का गोपनीय रिकॉर्ड रखा जाए.

क्यों जरूरी है यह कदम?

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के 2022 के आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल 1,70,924 आत्महत्याओं में से 13,044 छात्रों ने अपनी जान दी. 2001 में यह संख्या 5,425 थी. हर 100 आत्महत्याओं में 8 छात्रों की थीं. 2,248 छात्रों ने परीक्षा में असफलता के कारण आत्महत्या की. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये आँकड़े व्यवस्था में खामियों को दर्शाते हैं, जिन्हें तुरंत ठीक करना जरूरी है.

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत ये निर्देश जारी किए. कोर्ट ने कहा कि जब तक संसद या राज्य विधानसभाएं इस पर कानून नहीं बनातीं, तब तक यह आदेश अनुच्छेद 141 के तहत कानून की तरह लागू रहेगा. यह फैसला आंध्र प्रदेश में एक 17 वर्षीय नीट उम्मीदवार की आत्महत्या के मामले की सुनवाई के दौरान आया. यह छात्रा विशाखापट्टनम के एक कोचिंग सेंटर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थी और हॉस्टल में रहती थी. 14 जुलाई 2023 को उसकी मृत्यु हो गई.

उसके पिता ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच की मांग की थी. आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने 14 फरवरी 2024 को इस मांग को खारिज कर दिया था. इसके बाद पिता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जिसने अब CBI को इस मामले की जांच का आदेश दिया है. कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि ये दिशानिर्देश सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस रविंद्र एस. भट की अध्यक्षता वाली छात्र मानसिक स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय टास्क फोर्स के काम को पूरक बनाते हैं.

Supreme Court Order MBBS Student Suicide Case Supreme Court

Recent News