नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के धार स्थित विवादित भोजशाला-कमाल मौला कॉम्प्लेक्स को मंदिर घोषित करने वाले हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया है. हालांकि, संवेदनशील मुद्दे को देखते हुए मुस्लिम समुदाय को साइट के पास जुमे की नमाज पढ़ने की अनुमति दे दी गई है. मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने मंगलवार को कहा, "ये संवेदनशील मामले हैं. हम ऐसा कोई आदेश नहीं पास करना चाहते जो तनाव पैदा करे या कानून-व्यवस्था बिगाड़े." कोर्ट ने मामले की अंतिम सुनवाई तीन हफ्ते बाद तय की है.
अंतरिम व्यवस्था
विवाद की जड़
भोजशाला को हिंदू सरस्वती मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है. मई 2025 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ASI रिपोर्ट के आधार पर इसे मंदिर करार दिया था और 2003 के उस ASI आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें हिंदू-मुस्लिम दोनों को अलग-अलग दिनों में पूजा की अनुमति थी. हाईकोर्ट ने मुस्लिमों को धार जिले में मस्जिद बनाने के लिए वैकल्पिक जगह मांगने की भी अनुमति दी थी.
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी और अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया. सिंघवी ने कहा कि भारत इतिहास की परतों वाला देश है, "आंख के बदले आंख" वाला रवैया पूरे देश को अंधा कर देगा. चीफ जस्टिस ने कहा कि कोर्ट को बेहद सावधानी बरतनी होगी. यह फैसला भोजशाला विवाद में नया मोड़ लाया है. अब देखना होगा कि तीन हफ्ते बाद सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला क्या होता है.