नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर देशभर में छिड़ी सियासी जंग के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आधार और नागरिकता के बीच की लकीर को और गहरा कर दिया. प्रधान न्यायाधीश सूर्य कांत की अगुवाई वाली बेंच ने साफ कहा कि आधार कार्ड भूखे को राशन दिला सकता है, लेकिन यह वोटिंग का अधिकार नहीं देता.
सीजेआई ने मौखिक टिप्पणी में बेहद सटीक उदाहरण दिया. उन्होंने कहा, ''मान लीजिए कोई पड़ोसी देश से आया व्यक्ति भारत में रिक्शा चला रहा है या मजदूरी कर रहा है. हमारी संवैधानिक नैतिकता कहती है कि उसे भूखा नहीं रहने देंगे, इसलिए आधार देकर सस्ता अनाज दे सकते हैं. लेकिन क्या सिर्फ इसी आधार पर उसे भारत का वोटर बना देंगे?''
कोर्ट का यह सवाल सीधे उन राज्यों की ओर इशारा कर रहा था जहां SIR के नाम पर लाखों नाम काटे जा रहे हैं और आधार को ही निवास का सबूत मानने की मांग उठ रही है. पश्चिम बंगाल और केरल की ओर से पैरवी कर रहे कपिल सिब्बल ने दलील दी कि ज्यादातर वोटर अनपढ़ और गरीब हैं. उनके पास आधार है, पता है, घोषणा-पत्र है.
नाम काटने का बोझ मतदाता पर नहीं डाला जाना चाहिए. सिब्बल ने चेतावनी दी कि अगर यह प्रक्रिया पक्षपाती हुई तो गरीब आदमी सिस्टम के जाल में फंस जाएगा. जस्टिस जॉयमाला बागची ने दूसरा पहलू रखा. उन्होंने कहा, ''हम निर्वात में फैसला नहीं कर रहे. हकीकत यह है कि जो दल सत्ता में होता है, वह मृत मतदाताओं के नाम का दुरुपयोग करता रहा है.''
बेंच ने माना कि सॉफ्टवेयर डुप्लीकेट नाम तो हटा सकता है, मृत वोटरों के नाम नहीं. इसलिए BLO का घर-घर सर्वे और ड्राफ्ट लिस्ट का सार्वजनिक प्रदर्शन जरूरी है. कोर्ट ने पूछा, ''अगर कोई असली भारतीय नागरिक का नाम गलती से कट गया तो हम उसकी रक्षा करेंगे. लेकिन हमें एक भी ऐसा ठोस केस दिखाइए.''
बेंच ने यह भी याद दिलाया कि बिहार में SIR के दौरान मीडिया की सक्रियता की वजह से गांव-गांव तक सूचना पहुंची और शिकायतें न के बराबर आईं. चुनाव आयोग की ओर से राकेश द्विवेदी ने बताया कि 99% घरों में फॉर्म पहुंच चुके हैं, 50% से ज्यादा डेटा डिजिटल हो चुका है और प्रक्रिया में कोई रुकावट नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में चल रहे SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है. कोर्ट ने साफ किया कि अगर कोई वास्तविक नागरिक प्रभावित हो रहा है तो समय-सीमा बढ़ाने का आदेश दिया जा सकता है. केरल मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर, तमिलनाडु की 4 दिसंबर और पश्चिम बंगाल की 9 दिसंबर को होगी.