नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चुनाव समाप्त होने के बाद हिंसा रोकने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की तैनाती जारी रखने की मांग वाली याचिका पर सोमवार को तत्काल सुनवाई करने से मना कर दिया. अदालत ने साफ कहा कि इस तरह के फैसले सरकार को लेने चाहिए.
शीर्ष अदालत ने संकेत दिया है कि वह इस याचिका पर 11 मई को विचार कर सकती है. याचिका में चुनाव के बाद संभावित हिंसा को देखते हुए राज्य में केंद्रीय बलों को और समय तक तैनात रखने का निर्देश देने की गुहार लगाई गई है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ का बयान
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील वी. गिरी ने दलील दी. उन्होंने 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में हुई बड़ी हिंसा का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी स्थिति को दोहराने से रोकने के लिए केंद्रीय बलों को वहां रहने की इजाजत दी जानी चाहिए. निर्वाचन आयोग की तरफ से पेश वकील ने कहा कि मतदान पूरा होने के बाद आयोग की जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है.
पीठ ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि राज्य का प्रशासन सरकार के हाथ में होना चाहिए, न कि अदालत के. हालांकि, पीठ ने यह भी कहा कि 11 मई को मतदाता सूची के विशेष संशोधन (SIR) से जुड़ी अन्य याचिकाओं के साथ इस मामले पर भी सुनवाई हो सकती है. संक्षेप में, सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को सरकारी निर्णय का विषय मानते हुए अभी तुरंत दखल देने से परहेज किया है.