ये तस्वीरें शिमला की हैं, जहां बैरिकेडिंग तोड़कर प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते हैं तो पुलिस से उनकी झड़प हो जाती है. हजारों की भीड़ बस एक ही मांग पर अड़ी रहती है कि संजौली से अवैध मस्जिद हटाना होगा. हर हाल में सरकार को एक्शन लेना होगा, जब प्रदर्शनकारी रोके नहीं रुकते तो पुलिस उन पर लाठीचार्ज करती है. लेकिन इतने से भी बात नहीं बनती तो पानी की बौछार प्रदर्शनकारियों पर ठीक वैसे ही की जाती है, जैसे पश्चिम बंगाल में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए किया गया था, लेकिन हिंदू संगठनों की भीड़ पीछे नहीं हटती और धीरे-धीरे उस मस्जिद के पास पहुंच जाती है, जिसकी तीन मंजिल अवैध रूप से बनाए जाने का आरोप है.
जैसे ही लोगों की भीड़ मस्जिद के पास पहुंचती है, प्रशासन के हाथ-पांव फूल जाते हैं. क्योंकि वहां के डीजीपी जो ये कहते हैं कि इस मामले को स्थानीय विवाद के तौर पर हम देख रहे हैं. उन्हें लगता है थोड़ी भी गड़बड़ हुई तो बड़ा हंगामा हो सकता है. पुलिस की टीम गाड़ियों के ऊपर चढ़कर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश करती है, पर अवैध निर्माण पर तकरार ऐसा होता है कि हर प्रदर्शनकारी आर-पार के मूड में नजर आता है. सरकार को आखिर में ये आश्वासन देना पड़ता है कि मामला शिमला कोर्ट में है, अगर अवैध निर्माण मिलता है तो कार्रवाई होगी, लेकिन सवाल इस बात का है कि जिन मंत्रीजी ने ये मुद्दा उठाया, कांग्रेस सरकार की संजौली को लेकर आंखें खोली, उन्हें कौन धमकी दे रहा है. हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर दावे के साथ कहते हैं.
मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने जो विधानसभा के मानसून सत्र में मस्जिद को लेकर पहली बार बयान दिया था वो सच था. मंत्री ने अपनी पीड़ा जाहिर की थी. लेकिन अब मंत्री को कैबिनेट से हटाने तक बात पहुंच गई है जिसके बाद वह सहमे हुए हैं. यहां तक कि सोशल मीडिया पर ऐसी बातें भी होने लगी कि अनिरुद्ध सिंह को दिल्ली से कॉल आई और इस मुद्दे को उठाने के लिए डांट पड़ी है. हालांकि एक इंटरव्यू में जब अनिरुद्ध सिंह से इसे लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि दिल्ली से कोई कॉल नहीं आई, बस हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से इस मसले पर चर्चा हुई है.
हिमाचल की कांग्रेस सरकार को ये लग रहा है कि प्रदेश बीजेपी इसे सियासी मुद्दा बनाना चाह रही है, और प्रदर्शन को तुल दे रही है, जबकि प्रदेश बीजेपी के नेता इसे भावनात्मक मुद्दा बता रहे हैं, उनका कहना है कि सरकार को हर हाल में इस मुद्दे का सही समाधान करना ही होगा, क्योंकि मसला सिर्फ अवैध निर्माण का नहीं, बल्कि सुरक्षा से भी जुड़ा है. अनिरुद्ध सिंह ने जब सदन में खड़े होकर ये कहा था कि इस इलाके में बहन-बेटियों का चलना मुश्किल हो गया है तो हर कोई यही कह रहा था कि ऐसे तो शिमला की शांति व्यवस्था भंग हो जाएगी. पर सवाल ये उठता है कि पूरी मस्जिद को हटाने की मांग क्या जायज है.
प्रदर्शन कर रहे लोगों की डिमांड है कि हर हाल में मस्जिद हटाई जाए, भीड़ का गुस्सा देखकर ऐसा लग रहा है जैसे सरकार से निराश होकर ये लोग खुद एक्शन लेने को आतूर हैं. तस्वीरें देखकर ऐसा लगता है जैसे पहाड़ में अवैध निर्माण के खिलाफ धर्मयुद्ध शुरू हो गया है, और अब इंतजार हर किसी को सरकार के एक्शन का है, क्योंकि मामला सिर्फ विवाद का नहीं, दो समुदायों से जुड़ा है, इसलिए पुलिस हो या सरकार सबको फूंक-फूंककर कदम रखना होगा.