कोलकाता: पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़े बीजेपी कार्यकर्ता अभिजीत सरकार की हत्या के मामले में कोलकाता पुलिस के तीन कर्मियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है. पुलिसकर्मियों की पहचान सुभजीत सेन, रत्ना सरकार और दीपांकर देबनाथ के रूप में हुई है. इन तीनों ने कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण किया, और उन्हें 31 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने हाल ही में इन पुलिसकर्मियों के साथ-साथ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक विधायक और दो पार्षदों सहित अन्य व्यक्तियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. यह हत्या 2021 के विधानसभा चुनाव परिणामों की घोषणा के तुरंत बाद कोलकाता में हुई थी और इसे राज्य में चुनाव बाद हिंसा से जुड़ा पहला हत्याकांड माना जा रहा है.
पुलिसकर्मियों का विवादित प्रमोशन
सुभजीत सेन हत्या के समय नरकेलडांगा पुलिस स्टेशन के प्रभारी थे और बाद में उन्हें सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) के पद पर पदोन्नति दी गई थी, जिसके बाद वे सेवानिवृत्त हो गए. रत्ना सरकार, जो उस समय सब-इंस्पेक्टर थीं और इस मामले की प्रारंभिक जांच कर रही थीं, अब इंस्पेक्टर हैं. तीसरे आरोपी, दीपांकर देबनाथ, एक होम गार्ड हैं. जांच के दौरान इन पुलिसकर्मियों को मिली पदोन्नति ने जनता और सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी थी. CBI के विशेष न्यायाधीश ने इस पर आश्चर्य जताते हुए सवाल उठाया, "इतने गंभीर आरोपों के बावजूद, दो पुलिस अधिकारियों को पदोन्नति कैसे मिल सकती है?"
CBI की जांच और अन्य आरोपी
इस मामले में एक महिला सुजाता डे, को भी न्यायिक हिरासत में भेजा गया है. सुजाता मुख्य आरोपी अरुण डे की पत्नी हैं, जिन्हें CBI ने कुछ हफ्ते पहले गिरफ्तार किया था. सभी आरोपियों ने CBI विशेष कोर्ट में जमानत की अर्जी दी थी, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद उनकी हिरासत जारी है. CBI ने इस हत्याकांड में कुल 38 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें तृणमूल कांग्रेस के विधायक परेश पाल और पार्षद स्वपन समाद्दार और पापिया घोष शामिल हैं. सियालदह कोर्ट ने सभी आरोपियों के खिलाफ आरोपों का संज्ञान लिया है और समन जारी किया है. CBI ने अगस्त 2021 में कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश पर इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी, जिसके बाद कोलकाता पुलिस को जांच से हटा दिया गया था.
तृणमूल विधायक पर साजिश का आरोप
बेलियाघाटा विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल विधायक परेश पाल पर अभिजीत सरकार की हत्या की साजिश रचने का आरोप है. कोर्ट ने उन्हें और दो अन्य तृणमूल नेताओं को 12 अगस्त तक पेश होने का समन जारी किया है. इस मामले ने पश्चिम बंगाल की सियासत में भूचाल ला दिया है, क्योंकि यह 2021 की चुनावी हिंसा से जुड़ा पहला बड़ा मामला है, जिसमें सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं पर सीधे आरोप लगे हैं.
दूसरा बड़ा CBI मामला
यह कोलकाता पुलिस से जुड़ा दूसरा बड़ा CBI मामला है, इससे पहले RG कर रेप और हत्या मामले में भी पुलिसकर्मियों की भूमिका पर सवाल उठे थे. अभिजीत सरकार हत्याकांड ने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी उजागर किया है कि कैसे जांच के दौरान कुछ अधिकारियों को पदोन्नति दी गई, जिसने जनता में अविश्वास को बढ़ाया है. इस मामले ने पश्चिम बंगाल में सियासी तनाव को और बढ़ा दिया है. बीजेपी ने इस घटना को तृणमूल सरकार की "गुंडागर्दी" का सबूत बताया है, जबकि तृणमूल ने इन आरोपों को "राजनीति से प्रेरित" करार दिया है.