कोलकाता : पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के रामपुरहाट स्थित श्री श्री राधा गोविंद मंदिर को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब खत्म होता दिखाई दे रहा है. स्थानीय लोगों और भाजपा कार्यकर्ताओं की मदद से मंदिर परिसर के भोगघर से तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कथित कब्जा हटा दिया गया है, इसके बाद वहां चल रहा पार्टी कार्यालय बंद कराकर जगह को दोबारा मंदिर समिति को सौंप दिया गया. बताया जा रहा है कि कब्जा हटने के तुरंत बाद मंदिर परिसर में फिर से पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो गए. वर्षों बाद मंदिर का माहौल दोबारा पूरी तरह धार्मिक दिखाई देने लगा, जिससे स्थानीय श्रद्धालुओं में खुशी और उत्साह का माहौल है.
स्थानीय लोगों के अनुसार, श्री श्री राधा गोविंद मंदिर की स्थापना वर्ष 1990 में इलाके के लोगों ने आपसी सहयोग और चंदा जुटाकर की थी. समय के साथ यह मंदिर आसपास के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया. बाद में श्रद्धालुओं और साधु-संतों के लिए भोगघर निर्माण की योजना शुरू हुई थी. आरोप है कि इसी दौरान TMC से जुड़े कुछ लोगों ने निर्माण कार्य रुकवाकर उस स्थान पर कब्जा कर लिया और वहां पार्टी कार्यालय शुरू कर दिया.
मंदिर समिति और स्थानीय निवासियों का कहना था कि धार्मिक स्थल का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा था, जिससे लोगों की भावनाएं आहत हो रही थीं. कई बार विरोध के बावजूद स्थिति नहीं बदली. हालांकि, अब भाजपा कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों के हस्तक्षेप के बाद भोगघर को खाली करा लिया गया है. कब्जा हटने के बाद मंदिर परिसर को साफ-सुथरा कर फिर से धार्मिक गतिविधियों के लिए तैयार किया गया. स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर को उसकी पुरानी पहचान वापस मिल गई है. इस घटनाक्रम के बाद इलाके में राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है और दोनों दलों के समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.