लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद विभागों का बंटवारा होते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है. जिन नेताओं को बड़े और प्रभावशाली मंत्रालय मिलने की उम्मीद थी. उन्हें अपेक्षाकृत हल्के विभाग देकर संतुलन साधने की कोशिश की गई है. सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और नए मंत्री भूपेंद्र चौधरी को लेकर हो रही है. संगठन में मजबूत पकड़ रखने वाले भूपेंद्र चौधरी को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग दिया गया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उन्हें गृह, पीडब्ल्यूडी, ऊर्जा या कृषि जैसे बड़े मंत्रालय मिलने की उम्मीद थी. लेकिन विभाग आवंटन ने कई अटकलों पर विराम लगा दिया.
वहीं मनोज पांडेय को खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति जैसा अहम विभाग मिला है. जबकि अजीत सिंह पाल को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की जिम्मेदारी सौंपी गई है. सोमेन्द्र तोमर को सैनिक कल्याण और प्रांतीय रक्षक दल जैसे विभाग देकर क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश दिखाई दी. कृष्णा पासवान, कैलाश सिंह राजपूत, सुरेन्द्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा को राज्य मंत्री बनाया गया. लेकिन उनके विभागों को लेकर भी राजनीतिक हलकों में यह चर्चा रही कि उन्हें सीमित प्रभाव वाले मंत्रालय दिए गए हैं.
इस पूरे विस्तार में सबसे बड़ा संदेश एके शर्मा को लेकर माना जा रहा है. सरकार ने एक बार फिर उनकी स्थिति और प्रभाव को बरकरार रखा है. ऊर्जा और शहरी विकास जैसे अहम क्षेत्रों में उनकी पकड़ जस की तस बनी हुई है. दूसरी ओर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को लेकर लंबे समय से चल रही “बड़े प्रमोशन” की चर्चाएं भी फीकी पड़ गईं. इस विस्तार में उनका राजनीतिक कद बढ़ता नहीं दिखा. कुल मिलाकर योगी सरकार ने जातीय और क्षेत्रीय संतुलन तो साधा. लेकिन सत्ता का असली नियंत्रण अब भी पुराने भरोसेमंद चेहरों के हाथ में ही दिखाई दे रहा है।