उज्जैन में आईआईटी के दो भाइयों का अनोखा प्रयोग, 35 टन गोबर-मिट्टी से बना रहे इको-फ्रेंडली घर, एसी के बिना 4-5 डिग्री ठंडा रहेगा

Amanat Ansari 01 Nov 2026 08:04 PM 2 Mins
उज्जैन में आईआईटी के दो भाइयों का अनोखा प्रयोग, 35 टन गोबर-मिट्टी से बना रहे इको-फ्रेंडली घर, एसी के बिना 4-5 डिग्री ठंडा रहेगा

उज्जैन: उज्जैन की पॉश कॉलोनी संत नगर में आईआईटी से पढ़े दो भाई पारंपरिक तरीके से एक अनोखा इको-फ्रेंडली घर बना रहे हैं. इस घर की दीवारों पर पीली मिट्टी और गोबर का लेप किया जा रहा है, छत पर मिट्टी के खपरैल लगाए गए हैं और जमीन के नीचे से ठंडी हवा पहुंचाने के लिए अर्थ टनल बनाई जा रही है. दावा है कि इससे घर का तापमान बाहर के मुकाबले 4-5 डिग्री तक कम रहेगा और एसी की जरूरत कम पड़ेगी.

यह घर आईआईटी मुंबई से पढ़े प्रतीक यादव और आईआईटी खड़गपुर से पढ़े उनके भाई ऋतिक यादव बना रहे हैं. दोनों का बचपन गांव के परिवेश में बीता. उनके दादा कमल यादव और पिता गोपाल यादव दूध का व्यवसाय करते रहे हैं. शहरों में काम करने के बाद भी गांव का सुकून याद आने पर उन्होंने संत नगर में ऐसा घर बनाने का फैसला किया, जहां शहर में रहते हुए भी गांव जैसा माहौल मिल सके.

करीब पांच महीने से चल रहे इस निर्माण में करीब 35 टन गोबर और पीली मिट्टी का इस्तेमाल किया गया है. दीवारों पर मिट्टी, गोबर और चूने का मिश्रण लगाया जा रहा है, जिसमें उड़द दाल और गुड़ का भी उपयोग हुआ है. छत पर गुजरात से मंगाए गए मिट्टी के खपरैल लगाए गए हैं. दीवारों में मध्य प्रदेश से मंगाई गई रेड ब्रिक्स और ब्लैक स्टोन का इस्तेमाल किया गया है. दरवाजे और खिड़कियां पुराने पुश्तैनी मकान की लकड़ी से बनाई जा रही हैं. दीवारों पर केमिकल पेंट की जगह गेरू से पारंपरिक आकृतियां बनाने की योजना है.

घर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने के लिए अर्थ टनल बनाई जा रही है. इसमें तीन एयर डक्ट के लिए मोटे पाइप लगाए गए हैं, जिनका एक सिरा बाहर चौगान में खुलता है. पाइप जमीन में करीब 10 फीट नीचे जाकर लगभग 20 फीट लंबी चैनल से गुजरते हुए कमरों और बैठक में खुलते हैं. इनके मुहानों पर पंखे लगाए जाएंगे, जिससे जमीन के नीचे की अपेक्षाकृत ठंडी हवा घर तक पहुंचेगी. ऋतिक के मुताबिक, प्रदेश में इस तकनीक का इस्तेमाल अभी इक्का-दुक्का जगहों पर ही हुआ है.

निर्माण में रोज करीब 15 लोग काम कर रहे हैं और दीवारों पर मिट्टी-गोबर की लिपाई गांव की महिलाएं कर रही हैं. दोनों भाइयों ने उज्जैन में ‘Roots and Rituals Construction’ नाम से कंपनी भी शुरू की है और इसी तरह के प्राकृतिक निर्माण के और प्रोजेक्ट तैयार करना चाहते हैं. परिवार के तीन कुत्तों के लिए भी घर की डिजाइन में अलग जगह रखी गई है.

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