नई दिल्ली: तमिलनाडु के विपक्ष के नेता और डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन की सनातन धर्म को लेकर विवादित टिप्पणी अब एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. तमिलनाडु विधानसभा में हाल ही में ''सनातन धर्म को खत्म करना ही होगा'' जैसी टिप्पणी करने के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं. एक वकील अमिता सचदेवा ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका के तहत अतिरिक्त अर्जी दायर कर इस नई टिप्पणी का जिक्र किया है. अर्जी में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के हेट स्पीच पर सख्त निर्देशों के बावजूद उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई.
पिछला विवाद और नया मोड़
गौरतलब है कि सितंबर 2023 में उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू-मलेरिया से करते हुए इसे ''खत्म'' करने की बात कही थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट पहले भी उनकी कड़ी आलोचना कर चुका है. अब मई 2026 में तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय के सामने उन्होंने फिर यही बात दोहराई.
अर्जी में दावा किया गया है कि विधानसभा की कार्यवाही के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि ''जो सनातन धर्म लोगों में विभेद पैदा करता है, उसे निश्चित रूप से खत्म करना चाहिए.'' उदयनिधि स्टालिन ने सफाई देते हुए कहा है कि उनका निशाना किसी भगवान या धर्म पर नहीं, बल्कि जाति-आधारित भेदभाव पर है.
मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. इससे पहले भी इस मुद्दे पर कई याचिकाएं दायर हो चुकी हैं और अदालत कई बार इस पर सुनवाई कर चुकी है. यह घटनाक्रम तमिलनाडु की राजनीति में सनातन धर्म vs जातिवाद वाले पुराने विवाद को एक बार फिर तूल दे रहा है.