Changur Baba arrest: अंगूठी बेचने वाला एक व्यक्ति कैसे हिंदुस्तान में बड़ी साजिश रच रहा था, कैसे उसने कइयों का गिरोह बना रखा था, और खुद एक महिला के साथ लखनऊ के होटल में महीनों से रुका था, यूपी एटीएस से लुका-छिपा खेल रहा था, इसका खुलासा 5 जुलाई को तब हुआ, जब यूपी एटीएस ने उसे लखनऊ के एक होटल से गिरफ्तार किया, उसके साथ उसकी महिला साथी नीतू भी थी, जिसका धर्म उसने कुछ साल पहले ही बदलवा दिया था, नीतू का पति पहले ही गिरफ्तार हो चुका था, ये सब बाबा के वो चेले थे जो बाबा के एक इशारे पर कुछ भी करने को तैयार थे, लेकिन पुलिस की पूछताछ में जो राज खुले हैं, वो इससे भी बड़े हैं, होटल के कमरा नंबर 104 में ये लंबे वक्त से रुका था. यूपी एटीएस के एडीजी अमिताभ यश कहते हैं
“छांगुर बाबा ऊर्फ जमालुद्दीन जो खुद को पीर बाबा बताता था, उसकी जांच एसडीएम ने की, जिसमें पता चला ये प्रेमजाल में लड़कियों को फंसाकर धर्मांतरण करवाते थे. इस ग्रुप के 40 खातों का पता चला है, जिसमें से 100 करोड़ की लेन-देन की जानकारी मिली है.”
सूत्र बताते हैं छांगुर बाबा ने पुलिस पूछताछ में अपना गुनाह कबूल किया है, वो कई बार मुस्लिम मुल्कों की यात्रा भी कर चुका है, उसके पासपोर्ट से कई बड़े राज खुलने की उम्मीद है, खास बात ये है कि 16 करोड़ की लागत से इस गिरोह ने पुणे में एक जमीन भी खरीदी थी, जहां देशविरोधी साजिश रचने की प्लानिंग में ये लोग लगे थे, फिलहाल इसकी जांच में यूपी एटीएस के अलावा सीबीआई भी जुड़ी है. सीबीआई ने बकायदा अप्रैल महीने में इसके गांव में छापा भी मारा था, जिसमें ये पता चला था कि इसके खाते से करोड़ों के लेन-देन की जांच हो रही है. अब यहां सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर छांगुर बाबा किसकी शह पर ये सब कर रहा था, यूपी में जब धर्मांतरण विरोधी कानून पहले से लागू है, और योगी सरकार लव जिहाद को लेकर काफी सख्त रूख अपना रही है, फिर छांगुर बाबा ने किसकी मदद से ये सब किया, क्या उसे कोई राजनीतिक शह भी मिल रही थी. उसने बकायदा रेट कार्ड बनवा रखे थे.
“अगर कोई ब्राह्मण, सरदार और क्षत्रिय लड़की इनके जाल में फंसकर इस्लाम अपनाती तो उसे 15 से 16 लाख रुपए मिलते. दूसरी तरफ अगर कोई पिछड़ी जाति की लड़की इस्लाम अपनाती तो उसे 10 से 12 लाख रुपए मिलते. अन्य जाति की लड़कियों को भी इस्लाम में आने के लिए बड़ा लालच दिया जाता और उनका ब्रेनवॉश करके उन्हें 8 से 10 लाख दे दिए जाते. इनके निशाने पर मजदूर, मजबूर और गरीब परिवार और उनकी लड़कियां ही रहतीं थी.”
अब यूपी एटीएस इससे हर बड़े राज उगलवाने की कोशिश में जुटी है. आखिर इसका रैकेट कहां तक फैला था, विदेश से इसे फंडिंग कौन कर रहा था, इसका खुलासा होने के बाद ही पूरी कहानी सामने आएगी. न्यूज 18 अपनी रिपोर्ट में दावा करता है होटल आईडी और रजिस्टर से ये पता चला है कि नाम छिपाकर छांगुर बाबा वहां रुका था, लेकिन अब वो यूपी पुलिस की गिरफ्त में है.