नई दिल्ली: इंडिया ब्लॉक में एक बार फिर तालमेल को लेकर सवाल उठ खड़े हुए हैं. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा बुधवार को आयोजित लंच में समाजवादी पार्टी (सपा) नदारद रही. इस लंच के बाद विपक्षी सांसद जनतर मंतर की ओर निकले थे, जहां पुलिस ने उन्हें रोका और हिरासत में लिया.
सपा सूत्रों के अनुसार, अखिलेश यादव राहुल गांधी के सरप्राइज प्रदर्शनों को लेकर चिंतित हैं, खासकर मंगलवार को आकाशवाणी भवन में हुए धरने के बारे में पहले से जानकारी न दिए जाने को लेकर. कांग्रेस ने कहा कि कुछ सहयोगी दल इसलिए नहीं आ सके क्योंकि निमंत्रण बहुत कम समय में भेजे गए थे. जनपथ पर एक साउथ इंडियन रेस्तरां में यह लंच हुआ.
कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि लंच का फैसला मंगलवार रात देर से लिया गया और सभी इंडिया ब्लॉक पार्टनरों को निमंत्रण भेजे गए. उन्होंने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी-एसपी के प्रतिनिधि भी पहले से व्यस्त होने के कारण नहीं आ सके. एक कांग्रेस स्रोत ने कहा कि खड़गे जी के ऑफिस से सभी सहयोगियों, जिनमें सपा भी शामिल है, को लंच का निमंत्रण भेजा गया था. फैसला पिछली रात देर से लिया गया था.
कांग्रेस के संचार प्रमुख जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा, ''सभी इंडिया ब्लॉक पार्टियों को आज के लंच के लिए आमंत्रित किया गया था. लेकिन फैसला और सूचना मंगलवार रात देर से दी गई. इसलिए स्वाभाविक था कि कुछ पार्टियों के प्रतिनिधि शामिल नहीं हो सके. कुछ मीडिया आउटलेट्स इस पर अनावश्यक टिप्पणी कर रहे हैं. रमेश ने कहा कि इंडिया ब्लॉक और अन्य विपक्षी दल वोट चोरी, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और परिसीमन के खिलाफ एकजुट हैं.
सपा सूत्रों ने बताया कि अखिलेश यादव मंगलवार को आकाशवाणी भवन में राहुल गांधी के धरने के तरीके को लेकर नाराज हैं, क्योंकि सहयोगियों को पहले से जानकारी नहीं दी गई थी. हालांकि उन्होंने साफ नहीं कहा कि यही लंच न आने की वजह है. अखिलेश यादव मंगलवार को चुनाव आयोग के मार्च में शामिल हुए थे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे.
पुलिस ने मार्च रोका तो राहुल गांधी आकाशवाणी परिसर में घुस गए और शाम तक धरना दिया. सूत्रों के मुताबिक, समन्वय की यह चिंता सिर्फ मंगलवार तक सीमित नहीं है. अखिलेश को पहले भी प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी के सरप्राइज धरने (तब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग) के बारे में आखिरी समय में जानकारी मिली थी. तब भी उन्होंने हिस्सा लिया था, लेकिन आखिरी समय की सूचना सहयोगियों के साथ व्यवहार में आम बात नहीं बननी चाहिए.
यूपी चुनाव का असर?
यह घटना कांग्रेस और सपा के बीच अगले साल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सीट बंटवारे को लेकर पहले से जारी मतभेदों के बीच आई है. दोनों पार्टियों ने 2024 लोकसभा चुनाव में यूपी में गठबंधन किया था, जिसमें सपा ने 37 और कांग्रेस ने 6 सीटें जीती थीं. कुल मिलाकर, इंडिया ब्लॉक नेताओं को एकजुट करने वाला यह लंच सपा की अनुपस्थिति, कांग्रेस के देर से निमंत्रण वाले स्पष्टीकरण और हाल के प्रदर्शनों के समन्वय पर सपा की चिंताओं की वजह से चर्चा का विषय बन गया है. दोनों पार्टियां यूपी चुनाव से पहले साथ काम करती दिख रही हैं.