वाशिंगटन: अमेरिकी नौसेना का विशाल विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन 266 दिनों की लंबी तैनाती के बाद जल्द ही घर लौटने वाला है. मिडिल ईस्ट में ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियानों में शामिल रहे इस पोत पर सवार करीब 5,000 नाविकों और मरीन की हालत को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
अस्थायी नौसेना सचिव हंग काओ ने शुक्रवार को घोषणा की कि लिंकन निर्धारित रोटेशन के तहत अमेरिका लौटेगा. उन्होंने कहा कि मिशन की जरूरत के कारण तैनाती बढ़ाई गई थी. काओ ने जोर देते हुए कहा, “हमारे नाविकों और मरीनों की सुरक्षा हमेशा प्राथमिकता है.”
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पोत पर खाने की कमी, स्वच्छता सामग्री की कमी, टॉयलेट और पानी की व्यवस्था में समस्याएं तथा नियमित पोर्ट कॉल न होने जैसी शिकायतें सामने आई हैं. नाविकों और उनके परिवारों ने मनोबल और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है. कुछ नाविकों ने बताया कि पोत पर मनोबल बहुत कम है और आत्महत्या के विचारों की बातें बार-बार सुनाई दे रही हैं. हाल के महीनों में दो नाविक ओवरबोर्ड हो गए थे, जिन्हें बचा लिया गया.
नौसेना ने मानसिक स्वास्थ्य संकट के आरोपों से इनकार किया है. काओ के अनुसार, लिंकन ने 200 दिन युद्ध क्षेत्र में बिताए, 10,000 से ज्यादा सॉर्टीज किए और करीब 15 लाख पाउंड गोला-बारूद गिराया. उन्होंने कहा कि नाविक थके जरूर हैं, लेकिन लड़ाई से कभी बाहर नहीं हुए.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तैनाती की लंबाई पर चिंता खारिज करते हुए कहा, “नहीं, यह काफी लंबी नहीं है.” रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी परिस्थितियों को गलत तरीके से पेश किए जाने का आरोप लगाया. इस बीच, यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन लिंकन की जगह ले चुका है.