नई दिल्ली : पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी का हिंदू अल्पसंख्यकों को लेकर दिया गया बयान विवादों में है. 14 अगस्त को पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जरदारी ने हिंदुओं का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान में करीब 3 से 4 प्रतिशत हिंदू हैं और देश उन्हें “बर्दाश्त” करता है. उन्होंने पाकिस्तान को अल्पसंख्यकों के लिए सहिष्णु देश बताते हुए यह दावा भी किया कि वहां हिंदुओं को आजादी हासिल है.
हालांकि, राष्ट्रपति के इस बयान पर सबसे बड़ा सवाल खुद “बर्दाश्त” शब्द को लेकर उठ रहा है. आलोचकों का कहना है कि किसी देश के नागरिकों को धार्मिक पहचान के आधार पर “बर्दाश्त” करने की बात करना बराबरी के नागरिक अधिकारों की भावना के विपरीत है.
पाकिस्तान की जमीनी स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टें भी गंभीर चिंता जताती रही हैं. अप्रैल 2026 में संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं और लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन विवाह के मामलों पर चिंता जताई थी. विशेषज्ञों के मुताबिक 2025 में जबरन धर्म परिवर्तन के जरिए विवाह के मामलों में प्रभावित महिलाओं और लड़कियों में करीब 75 प्रतिशत हिंदू थीं.
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने भी हिंदू और ईसाई लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन और कम उम्र में विवाह के मामलों को लेकर चिंता दर्ज की है. आयोग ने पंजाब और सिंध में ऐसे मामलों को रोकने के लिए कानूनों के प्रभावी पालन की जरूरत बताई थी.