नई दिल्ली: सोमवार की सुबह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू ) के अंदर हिंसा भड़क उठी. वामपंथी छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शन के दौरान झड़पें हुईं, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमला और धमकाने के आरोप लगाए. कई छात्रों के घायल होने की खबर है. यह झड़प लगभग एक सप्ताह से चल रहे वामपंथी छात्र संगठनों के हड़ताल के बाद हुई, जो विश्वविद्यालय के कुलपति के कथित बयानों के खिलाफ था. जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कैंपस के अंदर हमला किया गया.
कुलपति के बयानों के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हुआ
JNUSU के अनुसार, वामपंथी छात्र संगठनों ने कुलपति के बयान के विरोध में प्रदर्शन आयोजित किया था, जिसमें तनाव बढ़ गया और प्रदर्शनकारियों पर पथराव किया गया. छात्र नेताओं ने दावा किया कि इस घटना में कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए. वामपंथी संगठनों ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के सदस्यों पर हमले का आरोप लगाया और कहा कि यह कैंपस के अंदर एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बाधित करने की कोशिश थी. घायलों और घटनाक्रम के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है.
एबीवीपी का आरोप: मास्क पहने समूहों ने किया हमला
इन आरोपों को खारिज करते हुए एबीवीपी ने वामपंथी संगठनों पर रात भर कैंपस में हिंसा फैलाने का आरोप लगाया. एक्स पर पोस्ट करते हुए संगठन ने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी के छात्र प्रतीक भारद्वाज पर स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज परिसर में हमला किया गया. उन पर फायर एक्सटिंग्विशर का पाउडर छिड़का गया और पीटा गया. एबीवीपी ने आगे दावा किया कि हमले के दौरान गैस सिलेंडर भी खोला गया और घायल छात्र को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया.
कैंपस में डर का माहौल बनाने का आरोप
एबीवीपी नेता और JNUSU के संयुक्त सचिव वैभव मीणा ने आरोप लगाया कि 300-400 मास्क पहने लोगों के समूह अकादमिक भवनों और पढ़ाई के स्थानों पर घूम रहे थे. उन्होंने लाइब्रेरी और रीडिंग रूम से छात्रों को जबरन बाहर निकाला. उन्होंने दावा किया कि एक अन्य छात्र विजय पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने हमला किया. मीणा ने इसे ''आतंक की रात'' करार देते हुए कहा कि शांतिपूर्वक पढ़ाई कर रहे छात्रों को खदेड़ा गया और पीटा गया, जबकि पुलिस ने स्थिति बिगड़ने के बावजूद कोई हस्तक्षेप नहीं किया.
सोशल मीडिया पर विवाद, कार्रवाई की मांग
एबीवीपी ने #LeftAttacksJNUAgain हैशटैग के साथ ऑनलाइन अभियान शुरू किया और वामपंथी समूहों पर विश्वविद्यालय को ''युद्ध का मैदान'' बनाने का आरोप लगाया. उन्होंने जिम्मेदार लोगों की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की. दिल्ली पुलिस ने अभी तक इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. दोनों पक्षों की शिकायतों की जांच होने की उम्मीद है, क्योंकि कैंपस में तनाव अभी भी बना हुआ है.