- वक्फ बोर्ड पर सुनवाई, सिब्बल बता रहे थे कुरान की बात, सिंघवी कर रहे थे हदीस पर चर्चा, तभी हुआ वेद का जिक्र!
- ‘लखनऊ का इमामबाड़ा हो जाएगा खत्म, जम्मू-कश्मीर में एक जबकि यूपी में एक भी वक्फ प्रॉपर्टी रजिस्टर नहीं’
- वक्फ कानून पर रोक या मोदी सरकार को हरी झंडी, सुनिए कोर्टरूम में क्या-क्या हुआ, अब क्या करने वाले हैं योगी?
Waqf Board: 22 मई 2025 को दोपहर के वक्त SC में वक्फ बोर्ड पर सुनवाई शुरू होती है, केन्द्र की तरफ से पक्ष रख रहे SG तुषार मेहता कहते हैं वक्फ सिर्फ दान है, वो इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है, जिस पर मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल और राजीव धवन परलोक का जिक्र करने लगते हैं, वेदों तक की बात करने लगते हैं, जरा आप भी पढ़िए कैसे वेदों का नाम लेकर वक्फ को बचाने की कोशिश की गई.
- सीनियर एडवोकेट राजीव धवन- मीलॉर्ड, वेदों के अनुसार मंदिर हिंदू धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं हैं. सनातन में अनिवार्य अंग नहीं हैं. वहां तो प्रकृति की भी पूजा करने का प्रावधान है, हिन्दू धर्म को मानने वाले अग्नि, जल, वर्षा, पर्वत, समुद्र सभी को देवता मानते हैं.
- सॉलिसटर जनरल तुषार मेहता- वक्फ इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है
- सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल- वक्फ ईश्वर को समर्पण है, परलोक के लिए. वक्फ सिर्फ समुदाय के लिए दान नहीं है, बल्कि ये तो ईश्वर के लिए समर्पण है. इसका उद्देश्य आत्मिक लाभ है
- सीजेआई जस्टिस बीआर गवई- हिंदुओं में मोक्ष की अवधारणा है
- जस्टिस एजी मसीह- ईसाई धर्म में भी स्वर्ग की आकांक्षा होती है
- कपिल सिब्बल कहते हैं- 1954 से 2013 तक पूरे देश में सिर्फ एक ही राज्य वक्फ सर्वेक्षण को पूरा कर सका है. यह किसके कारण हुआ? राज्य सरकारों के सर्वेक्षण न किए जाने के कारण समुदाय वंचित हो जाएंगे. J&K में 1 वक्फ पंजीकृत है, जबकि उत्तर प्रदेश में तो कोई भी नहीं. कल्पना कीजिए कि लखनऊ इमामबाड़ा खत्म हो जाए, यह बहुत बड़ी बात है.
- सॉलिसटर जनरल तुषार मेहता- मीलॉर्ड, अदालत को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है
- इतना सुनते ही कपिल सिब्बल गुस्से में कहते हैं आप सभी तरह के बयान देते हैं और हमें कहते हैं कि हमने अदालत को गुमराह किया, सच्चाई ये है कि कलेक्टर ने अगर कह दिया ये वक्फ की संपत्ति नहीं है तो उसके बाद क्या होगा, ये संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है,
सुनवाई के दौरान एक एडवोकेट ने तमिलनाडु के उस गांव का भी जिक्र किया, जहां हजार साल से ज्यादा पुराना चोल वंश का मंदिर है, लेकिन अब वक्फ बोर्ड उसे अपना बता रहा है, तमाम दलीलों को सुनने के बाद सीजेआई ने फैसला सुरक्षित रख लिया, अब फैसला क्या आता है, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं, लेकिन 21 मई को अदालत ने जैसे कहा था कि अगर अंतरिम राहत चाहिए तो मुस्लिम पक्ष को और मजबूत दलीलें लानी होगी, उससे लगता है सिब्बल, सिंघवी और धवन की दलीलों में ज्यादा दम कोर्ट को नजर नहीं आ रहा, हालांकि फैसला अदालत को करना है.
अगर केन्द्र के पक्ष में फैसला आया तो फिर दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश तक और जम्मू-कश्मीर से लेकर पश्चिम बंगाल तक वक्फ बोर्ड के नाम पर जबरन जमीन कब्जाए बैठे लोगों पर बड़ा एक्शन हो सकता है, यूपी में तो अवैध कब्जे पर बुलडोजर लंबे वक्त से चल रहा है, पर सोचने वाली बात ये है कि क्या वेदों का नाम लेकर अब वक्फ बोर्ड के कानून को असंवैधानिक ठहराने की तैयारी मुस्लिम पक्ष के वकीलों ने की है, अगर वेदों में मंदिर का जिक्र नहीं है, तो फिर यजुर्वेद में यज्ञ और पूजा-पाठ की पूरी प्रक्रिया का जिक्र क्यों है, सनातन धर्म की नींव ही मूर्तिपूजा है, और मूर्ति तो मंदिर में स्थापित होती है, फिर राजीव धवन ने ये दलील किस वेद के आधार पर दी है, ये भी बड़ा सवाल है.
Waqf Board Supreme Court hearing
Kapil Sibal Waqf argument
Vedas vs Waqf legal debate
Tushar Mehta on Waqf legality