क्या ''चीनी बांध'' बना तिब्बत की तबाही कारण, विशेषज्ञ चिंतित

Global Bharat 07 Jan 2025 05:11: PM 3 Mins
क्या ''चीनी बांध'' बना तिब्बत की तबाही कारण, विशेषज्ञ चिंतित

नई दिल्ली: तिब्बत में आए शक्तिशाली भूकंप की वजह से कम से कम 95 लोगों की मौत हो गई. भूकंप के झटके पड़ोसी नेपाल, भूटान और भारत में भी महसूस किए गए. तिब्बत में आए इस भूकंप ने एक बार चीन की इस क्षेत्र में एक बड़ा बांध बनाने की योजना को सवालों के घेरे में ला दिया है. चीन भूकंप नेटवर्क केंद्र के अनुसार, भूकंप सुबह 9:05 बजे (0105 GMT) आया, जिसका केंद्र टिंगरी में था, जो एक ग्रामीण काउंटी है जिसे एवरेस्ट क्षेत्र के उत्तरी प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाता है, जो 10 किमी (6.2 मील) की गहराई पर था. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्विस ने भूकंप की तीव्रता 7.1 बताई.

अब तक 95 लोगों की हुई मौत

चीन के सरकारी टेलीविजन ने छह घंटे बाद बताया कि तिब्बती क्षेत्र में कम से कम 95 लोगों की मौत हो गई और 130 लोग घायल हो गए. भूकंप का असर तिब्बत के शिगात्से क्षेत्र में महसूस किया गया, जहां 800,000 लोग रहते हैं. इस क्षेत्र का प्रशासन शिगात्से शहर द्वारा किया जाता है, जो तिब्बती बौद्ध धर्म के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों में से एक पंचेन लामा का पारंपरिक निवास स्थान है. चीन, नेपाल और उत्तरी भारत के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से अक्सर भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव के कारण भूकंप से प्रभावित होते हैं. 

नेपाल में मरे थे 9 हजार लोग

मंगलवार का भूकंप का केंद्र माउंट एवरेस्ट से लगभग 80 किलोमीटर (50 मील) उत्तर में था, जो दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत है. 1950 से अब तक ल्हासा ब्लॉक में 6 या उससे अधिक तीव्रता के 21 भूकंप आ चुके हैं, जिनमें से सबसे बड़ा भूकंप 2017 में मेनलिंग में आया 6.9 तीव्रता का भूकंप था. 2015 में नेपाल की राजधानी काठमांडू के पास 7.8 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें देश के अब तक के सबसे भयानक भूकंप में लगभग 9,000 लोग मारे गए थे और हज़ारों लोग घायल हुए थे. मृतकों में माउंट एवरेस्ट बेस कैंप में हिमस्खलन की चपेट में आने से कम से कम 18 लोग मारे गए थे.

जलविद्युत बांध बना रहा चीन

मेनलिंग तिब्बत की यारलुंग जांगबो नदी के निचले इलाकों में स्थित है, जहां चीन दुनिया का सबसे बड़ा जलविद्युत बांध बनाने की योजना बना रहा है. इस प्रोजेक्ट को लेकर भारत ने भी अपनी चिंताएं जाहिर की हैं. हालांकि बीजिंग अपनी योजना के साथ आगे बढ़ रहा है. चीन ने सोमवार को कहा कि ब्रह्मपुत्र नदी पर बनने वाले बांध से भारत और बांग्लादेश पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा. यह बात नई दिल्ली द्वारा प्रस्तावित परियोजना पर अपना विरोध दर्ज कराने के बाद कही गई. वहीं दुनिया भर लोग चीन इस कदम बर चिंता जता रहे हैं.

भारत ने दर्ज कराया है विरोध

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने एक मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि यारलुंग त्सांगपो नदी (ब्रह्मपुत्र नदी का तिब्बती नाम) पर चीन द्वारा जलविद्युत परियोजना का निर्माण कठोर वैज्ञानिक सत्यापन से गुजरा है और इससे निचले देशों के पारिस्थितिकी पर्यावरण, भूविज्ञान और जल संसाधनों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा. जियाकुन ने कहा कि यह बांध कुछ हद तक डाउनस्ट्रीम आपदा की रोकथाम, शमन और जलवायु परिवर्तन प्रतिक्रिया में योगदान देगा. इससे पहले भारत ने बांध को लेकर अपना विरोध जताया था.

हितों की रक्षा करेगा भारत

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि हमने चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में यारलुंग त्संगपो नदी (ब्रह्मपुत्र नदी) पर एक जलविद्युत परियोजना के संबंध में 25 दिसंबर 2024 को सिन्हुआ द्वारा जारी की गई सूचना देखी है. नदी के पानी पर हमारा अधिकार है और निचले तटवर्ती देश के रूप में, हमने लगातार विशेषज्ञ स्तर और कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से चीनी पक्ष को उनके क्षेत्र में नदियों पर मेगा परियोजनाओं को लेकर अपने विचार और चिंताएं व्यक्त की हैं. जायसवाल ने कहा कि नवीनतम रिपोर्ट के बाद इन चिंताओं को दोहराया गया है.

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