नेपाल-तिब्बत सीमा पर भूकंप से कितने लोगों की मौत, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और दिल्ली-एनसीआर में कैसे हैं हालात?

Amanat Ansari 07 Jan 2025 01:52: PM 1 Mins
नेपाल-तिब्बत सीमा पर भूकंप से कितने लोगों की मौत, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और दिल्ली-एनसीआर में कैसे हैं हालात?

नई दिल्ली: नेपाल-तिब्बत सीमा पर मंगलवार को आए 7.1 तीव्रता के भूकंप में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और 100 ज्यादा लोग घायल हो गए. कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह जानकारी सामने आई है. नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (एनसीएस) ने बताया कि भूकंप सुबह 6:35 बजे आया. जिसका केंद्र अक्षांश 28.86 डिग्री उत्तर और देशांतर 87.51 डिग्री पूर्व में 10 किलोमीटर की गहराई पर था.

भूकंप का केंद्र नेपाल सीमा के पास शिजांग (तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र) में स्थित था. समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, भूकंप के कारण जिजांग शहर में 32 लोग मारे गए तथा 38 अन्य घायल हो गए. इसके अतिरिक्त, शिगाजे के डिंगरी के चांगसुओ कस्बे में स्थित टोंगलाई गांव में कई मकान ढहने की खबरें आईं, जिसे शिगात्से के नाम से भी जाना जाता है.

भारत के प्रभावित राज्य

भूकंप से बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में भी झटके महसूस किए गए. इसके कुछ ही समय बाद इस क्षेत्र में दो और भूकंप के झटके दर्ज किए गए. सुबह 7:02 बजे 4.7 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिसका केंद्र अक्षांश 28.60 डिग्री उत्तर और देशांतर 87.68 डिग्री पूर्व में 10 किलोमीटर की गहराई पर था. कुछ ही मिनट बाद, सुबह 7:07 बजे 4.9 तीव्रता का एक और भूकंप 28.68 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 87.54 डिग्री पूर्वी देशांतर पर 30 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किया गया.

बिहार में घरों से निकले लोग

बिहार के कई इलाकों में भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे लोग घबराकर अपने घरों और अपार्टमेंट से बाहर निकल आए. हालांकि, अभी तक किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की खबर नहीं है. नेपाल भूकंपीय दृष्टि से सक्रिय क्षेत्र है, जहां भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेट आपस में टकराती हैं. हिमालय में टेक्टोनिक गतिविधि के कारण देश में अक्सर भूकंप आते रहते हैं.

नेपाल में मंडराया खतरा

यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, भूकंप नेपाल-तिब्बत सीमा के पास लोबुचे से 93 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में आया. खुंबू ग्लेशियर के पास स्थित लोबुचे, काठमांडू से लगभग 150 किलोमीटर पूर्व में और एवरेस्ट बेस कैंप से 8.5 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है. भूकंपीय गतिविधि ने इस क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है. नेपाल और भारत के प्रभावित हिस्सों में अधिकारी स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं. 

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