नई दिल्ली: उत्तर भारत में मौसम का मिजाज एक बार फिर बदलने वाला है. मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, एक तीव्र पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) 26 जनवरी से प्रभावी हो चुका है, जिसका असर हिमालयी क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक दिखाई देगा. 27 से 31 जनवरी और 1 फरवरी तक कई राज्यों में बारिश, ओले, तेज हवाएं और बर्फबारी जारी रह सकता है.
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, बिहार और छत्तीसगढ़ जैसे इलाकों में येलो अलर्ट जारी किया गया है. इनमें से कुछ जगहों पर मध्यम से भारी बारिश या बर्फबारी हो सकती है.
30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
27-28 जनवरी को मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिमी और उत्तरी राज्यों में हल्की-मध्यम बारिश के साथ 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से ठंडी हवाएं चलेंगी. पहाड़ी इलाकों जैसे हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भारी बर्फबारी से 'व्हाइटआउट' जैसी स्थिति बन सकती है. बारिश थमने के बाद 29-30 जनवरी से उत्तर-पश्चिमी बर्फीली हवाएं तेज होंगी, जिससे न्यूनतम तापमान में 3-5 डिग्री की गिरावट आएगी. तराई क्षेत्रों (उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब) में सुबह के समय बहुत घना कोहरा छाएगा, दृश्यता घटकर 50-100 मीटर तक रह सकती है, जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो सकता है.
बच्चों, बुजुर्ग, मरीजों को सतर्क रहने की जरूरत
31 जनवरी और 1 फरवरी को एक और नया विक्षोभ सक्रिय होने से पहाड़ों पर फिर से भारी बर्फबारी संभव है, जबकि मैदानों में शीतलहर (Cold Wave) का दौर फरवरी के शुरुआती दिनों तक बना रहेगा. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह सप्ताह ठंड का सबसे कड़वा दौर हो सकता है. बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को विशेष सतर्क रहने की जरूरत है.
किसान अपनी फसलों को बारिश और ओलों से बचाने के लिए एहतियात बरतें. वाहन चालकों को कोहरे में फॉग लाइट्स का इस्तेमाल और धीमी गति से चलने की सलाह दी गई है. कुल मिलाकर, जनवरी का अंत और फरवरी की शुरुआत उत्तर भारत के लिए 'ठंड का चैंबर' साबित हो सकती है, बारिश, बर्फ और कोहरे का तिहरा हमला.