कोलकाता : पश्चिम बंगाल की चर्चित लक्ष्मी भंडार योजना को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है. राज्य में महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर फर्जी लाभार्थियों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है. विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार की लापरवाही के कारण बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिए और गैर-नागरिक महिलाएं भी इस योजना का लाभ उठा रही थीं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच एजेंसियों और प्रशासनिक स्तर पर हुई शुरुआती पड़ताल में लाखों संदिग्ध आवेदनों की पहचान की गई है. दावा किया जा रहा है कि कई लाभार्थियों के दस्तावेज अधूरे थे, जबकि कुछ मामलों में आधार, राशन कार्ड और निवास प्रमाण पत्रों में गड़बड़ियां पाई गईं. विपक्ष ने आरोप लगाया है कि वोट बैंक की राजनीति के चलते सत्यापन प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं लिया गया.
भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर ममता बनर्जी सरकार पर तीखा हमला बोला है. उनका कहना है कि राज्य की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ केवल पात्र नागरिकों को मिलना चाहिए, लेकिन सरकार ने राजनीतिक फायदे के लिए नियमों को नजरअंदाज किया. वहीं तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया है. पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार समय-समय पर लाभार्थियों का सत्यापन कराती रहती है और किसी भी अनियमितता पर कार्रवाई की जाएगी.
सूत्रों के अनुसार, प्रशासन अब लाभार्थियों के दस्तावेजों की दोबारा जांच कराने की तैयारी में है. संदिग्ध मामलों में खातों को चिन्हित कर भुगतान रोकने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है. इस मुद्दे के सामने आने के बाद बंगाल की राजनीति में एक बार फिर घमासान तेज हो गया है और आने वाले दिनों में यह मामला और गरमा सकता है.