कोलकाता : पश्चिम बंगाल के प्रशासनिक मुख्यालय नबन्ना में हुई हाईलेवल रिव्यू मीटिंग के बाद राजनीतिक गलियारों में एक नई चर्चा शुरू हो गई है. क्या राज्य में अब कानून-व्यवस्था को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त प्रशासनिक मॉडल जैसी कार्यशैली अपनाई जाएगी. बैठक में मुख्य सचिव दुश्यंत नरियाला, गृह सचिव संगमित्रा घोष, डीजीपी सिद्ध नाथ गुप्ता और कोलकाता पुलिस कमिश्नर अजय नंद समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
मीटिंग का मुख्य फोकस राज्य की कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक हालात और नागरिक सुरक्षा को मजबूत करना रहा. अधिकारियों ने वर्तमान हालात की समीक्षा करते हुए कई अहम प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर चर्चा की.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था, सांप्रदायिक तनाव और प्रशासनिक चुनौतियों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं. ऐसे में इस तरह की हाईलेवल बैठक को सिर्फ सामान्य समीक्षा नहीं, बल्कि बड़े प्रशासनिक बदलाव की तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है.
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की पहचान अपराध नियंत्रण, माफिया के खिलाफ एक्शन, अवैध कब्जों पर बुलडोजर कार्रवाई और पुलिस प्रशासन को अधिक सक्रिय बनाने के लिए रही है. इसी वजह से सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या पश्चिम बंगाल भी अब इसी तरह का सख्त मॉडल अपनाने की ओर बढ़ रहा है.
हालांकि बैठक के बाद आधिकारिक तौर पर योगी मॉडल लागू करने जैसी कोई घोषणा नहीं हुई है. सरकार की ओर से सिर्फ इतना कहा गया कि राज्य में पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह शासन सुनिश्चित करना प्राथमिकता है. फिलहाल इतना साफ है कि नबन्ना की इस बैठक ने राजनीतिक हलकों में हलचल जरूर बढ़ा दी है. आने वाले दिनों में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक फैसलों पर नजर रहेगी कि क्या पश्चिम बंगाल में भी सख्त प्रशासनिक रुख देखने को मिलता है या यह केवल नियमित समीक्षा बैठक भर थी.