बुधवार: 13 मई को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे कमजोर स्तर 95.75 रुपए पर पहुंच गया. कारोबार की शुरुआत में थोड़ी रिकवरी दिखी, लेकिन दिन चढ़ते-चढ़ते फिर तेजी से गिरावट आई. मंगलवार को भी रुपया 40 पैसे की गिरावट के साथ 95.68 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था. लगातार दो दिनों से रुपए पर दबाव बना हुआ है.
शुरुआत में क्यों दिखी मजबूती?
सुबह के सत्र में रुपया पिछले बंद भाव से 16 पैसे मजबूत होकर 95.52 तक पहुंच गया था. बाजार को उम्मीद थी कि सोने-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ने से डॉलर की मांग कुछ कम हो सकती है.
सरकार का बड़ा फैसला
सरकार ने हाल ही में सोने और चांदी पर आयात शुल्क को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है. इसका मकसद आयात घटाना और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे दबाव को कम करना है. भारत इन दोनों धातुओं की बहुत बड़ी मात्रा में आयात करता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है.
फिर क्यों हुआ कमजोर?
शुरुआती बढ़त टिक नहीं सकी. कच्चे तेल की महंगाई और मजबूत अमेरिकी डॉलर के दबाव में रुपया फिर लुढ़क गया और 95.75 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर को छू लिया.
एक्सपर्ट्स की राय
विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों का मानना है कि फिलहाल रुपए की चाल मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर इंडेक्स पर निर्भर करेगी. हालांकि, सरकार का गोल्ड आयात कम करने वाला कदम रुपए को कुछ हद तक सहारा दे सकता है.
ग्लोबल स्थिति क्या है
FIIs की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने मंगलवार को भी भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली की. उन्होंने 1,959.39 करोड़ रुपए के शेयर बेचे, जिससे शेयर बाजार के साथ-साथ रुपए पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ा. कुल मिलाकर, रुपए की कमजोरी अभी भी जारी है और इसकी दिशा वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगी.