पश्चिम बंगाल : कोलकाता में भाजपा विधायक रितेश तिवारी के एक बयान ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है. रितेश तिवारी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा कि उन्हें इलाके के मुसलमानों से एक भी वोट नहीं मिला, इसलिए वे उन लोगों के लिए काम नहीं करेंगे जिन्होंने उनका समर्थन नहीं किया. उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और विपक्षी दलों ने इसे लेकर भाजपा पर निशाना साधना शुरू कर दिया है.
काशीपुर-बेलगाछिया विधानसभा क्षेत्र से विधायक तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि 1952 के बाद शायद वह पहले ऐसे विधायक हैं जिन्हें एक भी मुस्लिम वोट नहीं मिला. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उन्हें वोट दिया है, उन्हीं का उन पर अधिकार है. तिवारी ने मंच से कहा कि अगले पांच वर्षों तक वे उन लोगों के लिए कोई सिफारिश या सहायता नहीं करेंगे जिन्होंने उनका समर्थन नहीं किया. उन्होंने यहां तक कहा कि वह किसी के लिए सर्टिफिकेट तक जारी नहीं करेंगे.
अपने बयान के दौरान विधायक ने प्रधानमंत्री ने “सबका साथ, सबका विकास” नारे का जिक्र भी किया, लेकिन साथ ही “सबका हिसाब” की बात कहकर नया विवाद खड़ा कर दिया. तिवारी ने बाबा भोलेनाथ को साक्षी मानकर कहा कि विरोधियों के प्रति उनका रवैया राजनीतिक होगा, व्यक्तिगत नहीं. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी प्रकार की हिंसा, धमकी या दबाव की राजनीति में विश्वास नहीं रखते.
विधायक ने अपने भाषण में 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा का भी उल्लेख किया. उन्होंने दावा किया कि वे वैसा व्यवहार नहीं करेंगे जैसा उस समय कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया था. उनका कहना था कि उनका विरोध पूरी तरह लोकतांत्रिक तरीके से होगा और वे बिना किसी को नुकसान पहुंचाए अपनी राजनीतिक रणनीति अपनाएंगे.
इस बयान के सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है. विपक्षी दलों ने इसे संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है, जबकि भाजपा की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.