क्या यूपी की सियासत में सोमनाथ की एंट्री से बीजेपी को कोई खास फायदा होने वाला है, आखिर ये कैसा इत्तेफाक है कि करीब 60 मिनट तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की सर्द धूप में मुलाकात होती है, और फिर जब बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से मिलने योगी जाते हैं, तो उन्हें शिवलिंग और नंदी भेंट करते हैं...

क्या ये काशी की ओर कोई इशारा था, जिसका जिक्र सीएम योगी पहले भी करते रहे हैं कि वहां ज्ञानवापी में त्रिशूल और सनातन के निशान हैं, या फिर सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे होने पर बीजेपी भव्य कार्यक्रम आयोजित करवाकर हिंदुओं को एकजुट करना चाहती है,...आखिर अचानक से मोदी 1000 साल पुराने इतिहास की बात क्यों करने लगे हैं.....

और नेहरू का झूठ मोदी ने पकड़ा तो कांग्रेस क्यों बिलबिला उठी, अपने किताब में महमूद गजनवी को लुटेरा बताने वाले नेहरू क्या ये नहीं जानते थे कि गजनवी सिर्फ देश को लूटने नहीं बल्कि हिंदुस्तान का इस्लामीकरण करने की मंशा से आया था, उसके निशाने पर सिर्फ मंदिरों के सोना-चांदी और हीरे जवाहरात नहीं थे, बल्कि उसके निशाने पर था सनातन धर्म, हिंदू संस्कृति और सभ्यता, जिसे तलवार के दम पर वो बदलना चाहता था, वो हर तिलकधारी को जालीदार टोपी पहनाना चाहता था, और इसी मंसूबे के तहत आज के ठीक एक हजार साल पहले उसने एक प्लानिंग बनाई...
तारीख थी- 6 जनवरी 1026
जगह- गुजरात का सोमनाथ
आक्रांता महमूद गजनवी अपने सैनिकों को मंदिर तोड़ने का आदेश देता है, शिवलिंग को खंड-खंड करने की साजिश रचता है, शिवलिंग के खंड को मस्जिद के फर्श पर लगवाता है, ताकि वहां टोपीवालों के पैरों तले सनातनी आस्था को कुचला जाए, इसके बाद आते हैं कई मुस्लिम आक्रमणकारी, चाहे वो अल्लाउद्दीन खिलजी रहा, सुल्तान मुजफ्पर रहा, या महमूद बेगड़ा और औरंगजेब...सबने सोमनाथ मंदिर की शांति भंग करने की कोशिश की, भगवान महादेव के भक्तों को ठेस पहुंचाई, जिसका परिणाम ये हुआ कि वो खुद मिट्टी में मिल गए, लेकिन कांग्रेस को ये बात समझ नहीं आई, जब हिंदुस्तान आजाद हुआ और साल 1951 में सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ, राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने वहां जाने की इच्छा जताई तो नेहरू ने इसका विरोध किया, जिसका जिक्र पीएम मोदी अपनी चिट्ठी में करते हैं, वो लिखते हैं.

11 मई 1951 को सोमनाथ में भव्य मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए. उस अवस पर तात्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद भी मौजूद थे, लेकिन नेहरू उत्साहित नहीं थे, वो नहीं चाहते थे कि राष्ट्रपति और मंत्री इस समारोह का हिस्सा बनें. उन्होंने कहा था इस घटना से भारत की छवि खराब होगी. लेकिन राजेंद्र बाबू अडिग रहे, और फिर जो हुआ, उसने एक नया इतिहास रच दिया.
पीएम मोदी अपनी चिट्ठी में अहिल्याबाई होल्कर से लेकर डॉ. राजेन्द्र प्रसाद तक का जिक्र करते हैं, वो ये भी लिखते हैं कि सोमनाथ मंदिर को कोई बार उजाड़ा गया, पर वो हर बार बसता रहा और आज उसे उजाड़ने वाले मिट्टी में मिल चुके हैं...आज पूरा हिंदुस्तान सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मना रहा है, स्वामी विवेकानंद भी कहते थे दक्षिण भारत के प्राचीन मंदिर और गुजरात के सोमनाथ जैसे मंदिर आपको ज्ञान के अनगिनत पाठ सिखाएंगे.
आज हिंदुस्तान से ही ज्ञान का पाठ पूरी दुनिया पढ़ रही है, पर कुछ लोगों की आंखें अब भी नहीं खुली हैं...नेहरू ने जो गलती अपने दौर में की, कांग्रेस उसे आज तक दोहराती नजर आ रही है, वरना सोचिए सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का 50वां साल भव्य क्यों नहीं मना, अगर हजार साल बाद सोमनाथ का गौरव वापस लौट सकता है, वहां भव्य मंदिर बन सकता है, तो फिर हजार साल पुराना समृद्ध भारत क्यों नहीं बन सकता, क्या किसी नेता ने पहले ऐसा सोचा...