लखनऊ: अखिलेश यादव जिनसे दोस्ती करते हैं उनसे जब दुश्मनी करते हैं तो अंदाज़ थोड़ा अलग हो जाता है! कभी राजा भैया और अखिलेश यादव यूपी की सियासत में यंग दोस्त बने? सपा की सरकार जब बनी तो राजा भैया को अखिलेश यादव ने जेल मंत्रालय का जिम्मा सौंपा और मंत्री बनाया, जबकि साल 2012 में सपा पूर्ण बहुमत से जीती थी. और राजा भैया निर्दलीय विधायक बने थे! फिर भी मुलायम सिंह यादव के कहने पर अखिलेश की कैबिनेट में कुर्सी मिली! 2013 में जब तत्कालीन डीएसपी जिया उल हक़ की हत्या हुई थी. उनपर इस्तीफा देने का दबाव बना तब भी अखिलेश यादव ने राजा भैया का ही साथ दिया था.
साल 2018 में यूपी राज्यसभा चुनाव था. साल 2017 में अखिलेश यादव विधानसभा का चुनाव बीजेपी से बुरी तरह हारकर सत्ता गंवा चुके थे. साल 2019 लोकसभा चुनाव की तैयारी कर रहे थे. उस वक्त समाजवादी पार्टी को एक मजबूत गठबंधन की तलाश थी और गठबंधन होने वाला था BSP सुप्रीमो मायावती से लेकिन इस गठबंधन से यूपी का एक नेता बहुत ज्यादा नाराज था और वो चेहरा था- राजा भैया का. वो बसपा चीफ मायावती ही थीं जिनकी सरकार में राजा भैया को जेल जाना पड़ा. ऐसे में राजा भैया भला अखिलेश यादव का रिश्ता कैसे स्वीकार कर सकते थे. अब दुश्मनी पिछले 7 सालों से जारी है...राजा भैया योगी के फैन बन चुके हैं, विधानसभा में योगी का पैर छूना. उन्हें अपना आदर्श बताना. खुले मंच पर योगी सरकार का बचाव करना, राम मंदिर पर योगी का साथ देना, बांग्लादेश और बंगाल पर खुलकर देश का साथ देना समाजवादी पार्टी के लिए ख़तरा बनता जा रहा है?
जैसे समाजवादी पार्टी अयोध्या में अवधेश पासी को चेहरा बना रही है, आगरा में रामजीलाल सुमन ठीक वैसे ही हिन्दू राष्ट्र और हिन्दू नेताओं को योगी भी आगे बढ़ा रहे हैं, जिसमें सबसे बड़ा नाम राजा भैया का ही है! इस बात से समाजवादी पार्टी में बौखलाहट है कि विधानसभा चुनाव कहीं धर्म पर शिफ्ट ना हो जाए! ख़बर है कि गुलशन यादव लगातार समाजवादी पार्टी के नेताओं से राजा भैया को हरा देने का वादा कर रहे हैं, हमारे सूत्र बताते हैं कि समाजवादी पार्टी कार्यालय कई चक्कर गुलशन यादव काट रहे हैं! पिछले साल गुलशन यादव को पुलिस गिरफ्तार भी करने गई थी. राजा भैया से दुश्मनी लेने के बाद उनकी चुनौतियां भी बढ़ गई हैं, डकैती की धारा में प्रतापगढ़ पुलिस ने गिरफ्तार किया था. निकाय चुनाव हो या फिर विधायक का चुनाव, गुलशन हर जगह राजा भैया से पंगा ले रहे हैं? अखिलेश यादव इस बार बड़ी तैयारी में हैं? सूत्र तो ये भी कहते हैं कि राजा भैया के ख़िलाफ़ इस बार सपा कोई PDA का धाकड़ उम्मीदवार उतारेगी! गुलशन यादव से ज्यादा प्रभावशाली नेता की तलाश की जा रही है! क्योंकि प्रतापगढ़ में राजा भैया PDA के वोट से ही विधायक बनते हैं, प्रतापगढ़ से कुछ दूर है कौशांबी, वहां से केशव प्रसाद मौर्य को हराने की कसम खाए बैठे अखिलेश यादव ने बीते चुनाव में कौशांबी से केशव मौर्या को हराकर ही दम लिया! अब उनके निशाने पर हैं राजा भैया? मामला दिलचस्प होगा, क्योंकि कुंडा का सवाल है? राजा भैया के साथ योगी खड़े हैं, और प्रतापगढ़ में बहुत जल्द कोई कार्यक्रम भी होने वाला है! राजा भैया को कोई ऐसा दुश्मन अभी तक नहीं मिला जो उनके जीत का रथ रोक पाए? क्या अखिलेश यादव ऐसा कर पाएंगे?