96 घंटे बीतने के बाद भी पहलगाम के चारों दुश्मनों को सुरक्षाबल क्यों नहीं पकड़ पा रहे, कहां मुश्किल आ रही?

Abhishek Chaturvedi 25 Apr 2025 06:09: PM 3 Mins
96 घंटे बीतने के बाद भी पहलगाम के चारों दुश्मनों को सुरक्षाबल क्यों नहीं पकड़ पा रहे, कहां मुश्किल आ रही?
पहलगाम घटना के 96 घंटे बीते, न एक गिरफ्तारी हुई, न दुश्मन ढेर हुआ, आखिर दिक्कत कहां आ रही? जानिए
इंडियन आर्मी का कश्मीर में तांडव, 1600 संदिग्धों को उठाया, खुले ऐसे-ऐसे राज, दिल्ली तक मच गया हड़कंप!
कौन है वो विधायक,जिसने पाकिस्तान की तारीफ, तो हिमंता बिस्वा सरमा की पुलिस ने उठाया, जेल में डाला!

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुई घटना को 96 घंटे बीत चुके हैं, हजारों की संख्या में इंडियन आर्मी के जवान सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं, करीब 1600 संदिग्धों को घाटी से उठाया गया है, एक-एक की मोबाइल डिटेल खंगाली जा रही है, त्राल के जंगलों में जहां दुश्मनों के छिपे होने की ख़बर है वहां स्पेशल फोर्सेज के जवान एक-एक कोना खंगाल रहे हैं, बावजूद उसके अब तक चारों दुश्मन नहीं पकड़े गए, जिनके स्केच जारी हुए हैं, जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर दिक्कत कहां आ रही है, जब इंडियन आर्मी को दिल्ली से सीधा आदेश है दुश्मनों को मिट्टी में मिला दे, जहां भी दिखे उसे उसी की भाषा में जवाब दो, हेलीकॉप्टर ले जाना है या नाइट विजन कैमरा चाहिए, बुलेटप्रूफ जैकेट कम पड़े या आधुनिक से आधुनिक सामान चाहिए, सबकुछ लेकर उतरो और दुश्मनों को पाताल से भी ढूंढ निकालो, फिर भी दुश्मन पकड़े क्यों नहीं जा रहे, इसका जवाब बेहद चौंकाने वाला है, जिसके बारे में आपको बताएं उससे पहले एक दो ऐसे लोगों की तस्वीर आपको दिखाते हैं, जो रहते हिंदुस्तान में हैं, पैसा हिंदुस्तान से लेते हैं, पर गाते पाकिस्तान की हैं.

पहली तस्वीर है असम के AIUDF पार्टी के विधायक अमीनुल इस्लाम की, जो दावा करते हैं ये केन्द्र सरकार की साजिश है, साथ ही ये भी कहते हैं नाम नहीं पूछा गया बल्कि रात के अंधेरे में ऐसा हुआ, जबकि हकीकत ये है कि ये घटना दिनदहाड़े हुई थी, इन पर कई बार पाकिस्तानपरस्त होने के आरोप लगते रहे हैं, जिसे देखते हुए असम पुलिस ने इन्हें तुरंत उठाकर जेल में डाल दिया, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने साफ कहा असम की धरती से जो भी पाकिस्तान का समर्थन करेगा, उसे सजा मिलेगी. जबकि दूसरी तस्वीर झारखंड के नौशाद की है, जो पहलगाम में हुई घटना के लिए दुश्मनों का शुक्रिया अदा कर रहा था, जिसे झारखंड पुलिस ने उठाकर जेल में डाल दिया. ऐसे ही कुछ लोगों की वजह से जम्मू-कश्मीर समेत देश के कई हिस्सों में देशविरोधी घटनाएं बढ़ती हैं, क्योंकि ये वही लोग हैं जो देश के दुश्मनों को पनाह देते हैं, उन्हें खाना-पानी देते हैं, उन्हें रास्ता बताते हैं, अपने ही देश के खिलाफ काम करते हैं, और जम्मू-कश्मीर में जो दुश्मन नहीं पकड़े जा रहे हैं, उसके पीछे भी बड़ी वजह यही है.

रिपोर्ट बताती है...

  • जिस बैसरन घाटी में ये घटना हुई, वहां सिक्योरिटी भी कम थी,, और सीसीटीवी कैमरे भी नहीं हैं
  • ये घाटी दोनों तरफ से पहाड़ों से घिरी हैं, बाईं तरफ का जंगल किश्तवाड़ जाता है, दाईं तरफ त्राल का जंगल है
  • त्राल वही इलाका है, जो कभी हिज्बुल मुजाहिद्दीन का गढ़ था, 2020 में सेना ने इसे उनसे मुक्त कर दिया
  • लेकिन यहां के कुछ लोकल लोग नहीं बदले, बुरहान वानी और जाकिर मूसा जैसे दुश्मन यहीं के रहने वाले थे
  • कई लोकल लोगों को पुलिस ने उठाया है, जिनसे पूछताछ कर ये पता किया जा रहा है दुश्मनों का अड्डा कहां है

एक्सपर्ट बताते हैं त्राल के जंगलों में छिपना आसान है, दुर्गम पहाड़ी वाले इलाके में पाकिस्तान से आए दुश्मन लोकल लोगों के सपोर्ट से पहाड़ों में गुफा बनाकर रहते हैं, उन्हें इस बात की खास ट्रेनिंग दी जाती है कि जंगलों में कभी फंस गए तो कैसे रहना है, ज्यादा से ज्यादा पैदल चलना है, 10 मिनट में करीब 1 किलोमीटर की दूरी ये लोग पैदल तय करते हैं, ऐसे में 96 घंटे बीत जाने के बाद ये लोग कहां गए, कहां छिपे इसका अंदाजा अभी सुरक्षाबल के जवान लगा रहे हैं, ये तय है कि इनमें से कोई बचेगा नहीं, पर कब तक बचेगा ये बड़ा सवाल है.

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