Delhi Red Fort blast: क्या हिंदुस्तान में पुलवामा से बड़ी साजिश की प्लानिंग बन रही थी, और इस बार इस साजिश में शामिल थे देश के व्हाइट कॉलर लोग, जिसमें कोई डॉक्टर तो कोई प्रोफेसर था,आखिर जम्मू-कश्मीर के पुलवामा का रहने वाला डॉक्टर मुजम्मिल, फरीदाबाद में किराये का कमरा क्यों लेता है, वो वहां रहता नहीं, बल्कि सामान रखता है, और सामान था 350 किलो अमोनियम नाइट्रेट, जिसका इस्तेमाल खादानों में होता है, इससे भारी तबाही मच सकती थी.
इधर ये डॉक्टर गिरफ्तार होता है, उधर लखनऊ से उसकी गर्लफ्रेंड शाहिन शाहीद भी पकड़ी जाती है, जो कार में अवैध सामान लेकर घूमती थी, कोई उससे बोले तो उसे वहीं निपटा सकती थी. ये दोनों फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े बताए जा रहे हैं तो क्या वो यूनिवर्सिटी देशविरोधियों का सेंटर बनती जा रही थी.
इन दोनों से पहले इसी महीने यूपी के सहारनपुर से पुलिस ने डॉ. आदिल अहमद की गिरफ्तारी हुई थी, वो भी कश्मीर का रहने वाला निकला, अब इन तीनों में से कौन पाकिस्तान गया था, किसने ट्रेनिंग ली थी, इसका खुलासा होना अभी बाकी है, लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि इससे पहले गुजरात से तीन संदिग्ध दबोचे किए, जिसमें से दो यूपी के निकले. पता चला ये लोग सामान जुटाने गुजरात पहुंचे थे, लेकिन पहले ही दबोच लिए गए. पर इनके पास से जो शीशी मिली, वो होश उड़ाने वाली थी.
पता चला कि ये अरंडी के पौधे से निकला रिसीन लेकर घूम रहे थे, जिसके बारे में विशेषज्ञ कहते हैं, इसे हवा में छोड़ दिया जाए तो हवा जहरीली हो जाती है, पानी में मिला दिया जाए तो बड़ा नुकसान करता है. इसका कोई इलाज नहीं होता. यानि इनकी प्लानिंग बेहद चौंकाने वाली थी, इस मामले में 2 डॉक्टर समेत 7 गिरफ्तारियां अब तक हुई हैं. जिसमें बुर्के वाली शाहीन भी शामिल हैं.
जम्मू-कश्मीर पुलिस का दावा है कि संदिग्धों के कब्जे से अब तक कुल 2900 किलो IED बनाने का सामान बरामद किया गया है. ये लोग जैश और अंसर गजवात-उल-हिंद जैसे प्रतिबंधित संगठनों के इशारे पर काम कर रहे थे. विदेशी हैंडलर्स के आदेश पर सोशल मीडिया और एनक्रिप्टेड चैनल के जरिए ये जुड़े हुए थे.
यानि इनकी प्लानिंग बहुत बड़ी थी, इससे पहले भी कई दुश्मन पकड़े गए हैं, और हर बार सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इतनी सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद कोई क्विंटल-क्विंटल अवैध सामान अपने घर में कैसे जमा कर ले रहा है, और इस काम में इनकी मदद कौन कर रहा है, आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.
लेकिन जिस तरीके का व्हाइट कॉलर नेटवर्क इस बार सामने आया है, इसने सबको चौंका दिया है, सुरक्षा एजेंसियों को ये सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या संदिग्ध मदरसों के बाद अब संदिग्ध यूनिवर्सिटी और संदिग्ध कॉलेज की भी पहचान करनी होगी, वहां पढ़ने और पढ़ाने वालों की कुंडली खंगालनी होगी, क्योंकि लखनऊ में जिस तरीके से वो महिला पकड़ी गई, वो साफ इशारा करता है मोदी-योगी समेत कई वीवीआईपी की सुरक्षा को बड़ा खतरा हो सकता है. क्योंकि दुश्मनों के निशाने पर यही नेता रहते हैं.
रिटायर्ड मेजर जनरल जीडी बख्शी कि ये खतरनाक है, अगर मिसहैपनिंग होती तो पूरा गांव तबाह हो सकता था. इसका असर कई किलोमीटर तक दिखाई दे सकता था. भगवान का शुक्र है, पुलिस ने इन साजिशकर्ताओं को पहले ही दबोच लिया, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कई जगहों पर सघन सर्च ऑपरेशन चलाया, और अब 3 एंगल पर मामले की जांच में जुटी है.
चूंकि मामला कई राज्यों से और देश की सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए इस केस में एनआईए की एंट्री भी हो सकती है. और जो सवाल अब तक लोगों के मन में उठ रहा था कि पुलवामा में उतना सामान कहां से आया, वो सवाल अब फिर से जिंदा होने लगा है कि इस बार इतनी भारी मात्रा में ऐसे सामान दुश्मनों के पास किसने पहुंचाए और इनकी प्लानिंग क्या थी.