देहरादून: माथे पर पगड़ी, बाएं हाथ में बंदूक, दाएं हाथ में पिस्टल, जुबान पर गाली और दे दना-दन फायरिंग. पीली कोट पहने नेताजी का नाम है कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, ऐसा लगता है आर-पार के मूड में तैयार खड़े हैं, पहले खूब चिल्लाते हैं. विधायक उमेश कुमार के घर पर पत्थऱ फेंकवाते हैं और जीप में बैठकर लौट जाते हैं. वीडियो वायरल होते ही हरिद्वार एसएसपी परमेंन्द्र सिंह डोभाल एक्टिव होते हैं और बीजेपी नेता को गिरफ्तार करवाते हैं ताकि मामला न बढ़े.
अदालत प्रणव चैंपियन को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज देती है, लेकिन मामला जितना सीधा दिखता है, उतना है नहीं, जांच में पता चलता है. खानपुर से विधायक उमेश कुमार ने प्रणव सिंह चैपिंयन के घर जाकर फायरिंग की धमकी दी थी. जिसके बाद कुंवर प्रणव ने अगले दिन धमकी को हकीकत में बदल दिया. नतीजा ठंड के मौसम में पहाड़ की सियासत और प्रशासन का पारा दोनों गरम हो गया. उसके बाद जो कहानी खुली, वो और दंग करने वाली थी.
नए-नए नेता बने उमेश कुमार से कुंवर प्रणव की अदावत 3 साल पुरानी है. जिस खानपुर सीट से प्रणव चैंपियन 4 बार विधायक रहे, वहां से साल 2022 के चुनाव अपनी पत्नी कुंवरानी देवयानी को मैदान में उतारा, लेकिन पत्रकार से नेता बने उमेश कुमार ने उनकी पत्नी को चुनाव हरा दिया और निर्दलीय विधायक बन गए. बस यहीं से दोनों एक दूसरे के दुश्मन बन गए, सियासत में हार-जीत होती रहती है, पर ये बात तब बढ़ गई जब 25 जनवरी को आए हरिद्वार नगर निकाय चुनाव के नतीजों में कुंवर प्रणव की समर्थित प्रत्याशी और बीजेपी उम्मीदवार अनीता अग्रवाल की हार हो गई.
उसी शाम कुंवर प्रणव ने सोशल मीडिया पर उमेश कुमार के खिलाफ भद्दे-भद्दे पोस्ट लिखे, उमेश कुमार को पता चला तो उसी रात 11 बजे वो कुंवर प्रणव के लंढौरा वाले घर के बाहर गए और उन्हें बाहर निकलने की चुनौती देने लगे, ये वीडियो उसी दौरान का बताया जा रहा है, तस्वीरों में साफ देख सकते हैं कुंवर प्रणव का घर दिख रहा है, बाद में पता चला प्रणव उस दौरान वहां नहीं बल्कि देहरादून वाले घर पर थे.
जानकारी मिली तो 26 जनवरी की शाम करीब 4 बजे 3 गाड़ियां लेकर विधायक उमेश कुमार के ऑफिस पर हमला कर दिया, करीब 50 राउंड फायरिंग की, जब पुलिस आई तो उमेश कुमार हाथ में पिस्तौल लेकर निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया, किसी तरह मामला शांत हुआ, प्रणव ने इसे मां के सम्मान से जोड़ा और कहां मां को गाली दी थी, इसलिए छोड़ूंगा नहीं.
आधी रात को विधायक उमेश कुमार धरना देने पहुंच गए, दबाव में प्रणव चैंपियन ने नेहरू कॉलोनी वाले थाने में सरेंडर कर दिया, उधर प्रणव की चैंपियन ने उमेश कुमार की गिरफ्तारी की शिकायत दी, नतीजा उमेश को भी पुलिस ने पकड़ा, लेकिन विधायक को जमानत मिल गई, जबकि पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन जेल में हैं, दिनहाड़े हुई ऐसी घटना को लेकर पुलिस पर सवाल उठे तो प्रणव, उनकी पत्नी और उनके बेटे के नाम जारी हुए कुल 9 लाइसेंसी हथियार रद्द कर दिए गए. हरिद्वार के एसएसपी परमेंन्द्र सिंह डोभाल ने कहा कानून के मुताबिक हम कार्रवाई कर रहे हैं. लेकिन सवाल है खानपुर की जनता ने विकास नहीं बल्कि बाहुबलियों की लड़ाई देखने के लिए वोट किया था.
मंत्री की डिनर पार्टी में भी चला दी थी गोली
खुद को लंढौरा रियासत का राजा बताने वाले प्रणव चैंपियन गिरफ्तार भले ही पहली बार हुए हैं, लेकिन उनका विवाद पहला नहीं है. बल्कि साल 2013 में मंत्री हरक सिंह रावत की डिनर पार्टी में गोली चलाने के आरोप भी इन पर लगे. साल 2018 में बीजेपी विधायक देशराज कर्णवाल के साथ बड़ा विवाद हुआ. यहां तक कि साल 2019 में दिल्ली के उत्तराखंड सदन में एक पत्रकार को थप्पड़ तक जड़ डाला. एक वक्त ऐसा भी आया, जब हथियार लहराने के मामले में पार्टी ने निकाल दिया पर फिलहाल बीजेपी में ही हैं और इस बात दबाव वहां की सरकार पर ही है कि वह अब तक कोई एक्शन क्यों नहीं लिया.
हालांकि पेशे से पत्रकार रहे उमेश कुमार भी कोई दूध के धूले नहीं है. मुजफ्फरनगर के रहने वाले उमेश ने ही स्टिंग ऑपरेशन कर हरीश रावत की सरकार गिराई थी. ये बात वहां का बच्चा-बच्चा कहता है. त्रिवेन्द्र रावत की सरकार में इन्हें जेल भी हुई पर अब कहानी पलट चुकी है. ऐसा लगता है उत्तराखंड अब बिहार बनता जा रहा है जहां की सियासी गैंगवार की कहानियां फिल्मों में दिखाई जाती है.